विजय उपचुनाव पर रोक हटाने के लिए पहुंचे मद्रास उच्च न्यायालय

चेन्नई, 28 अगस्त (वार्ता) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विधानसभा की पांच सीटों पर उपचुनाव कराने पर लगी अंतरिम रोक हटाने की अपील की।

इन पांच सीटों में तिरुचि पूर्व भी शामिल है जहां से वह जीते थे और बाद में इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उन्होंने अपनी दूसरी सीट पेरंबूर को अपने पास रखने का फैसला किया था।

पलयमकोट्टई के वेंकटाचलपति की ओर से दायर एक पीआईएल पर अंतरिम रोक लगाई गई। इस पीआईएल में तिरुचि पूर्व, करूर, विरलिमलाई, पेरुंदुरई और अंबासमुद्रम सीटों पर उपचुनाव की घोषणा पर रोक लगाने की मांग की गई थी क्योंकि इन पांचों निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी चुनाव याचिकाएं अभी लंबित हैं।

मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने पहले चुनाव आयोग को उपचुनावों की घोषणा करने से रोक दिया था। चुनाव आयोग ने न्यायालय को यह भी बताया था कि जब तक चुनाव से जुड़े सभी लंबित मामलों का निपटारा नहीं हो जाता तब तक चुनाव नहीं कराए जाएंगे; और पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस रोक को आठ सितंबर तक बढ़ा दिया था।

अपनी याचिका में श्री विजय ने तर्क दिया कि तिरुचि पूर्व में उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनावी याचिका 17 जून को दायर की गई थी जबकि उन्होंने 10 मई को ही सीट छोड़ दी थी और स्पीकर ने उनका इस्तीफ़ा तब स्वीकार किया था जब कोई चुनावी याचिका लंबित नहीं थी।

उन्होंने तर्क दिया कि जिस निर्वाचन क्षेत्र की सीट पहले ही खाली हो चुकी है उसके खिलाफ चुनाव याचिका नहीं दायर की जा सकती। उपचुनाव रोकने की मांग करने वाला न तो चुनाव याचिका दायर करने वाला व्यक्ति था और न ही उस निर्वाचन क्षेत्र का कोई मतदाता था।

श्री विजय ने आगे दावा किया कि यह पीआईएल बिना किसी कानूनी आधार के दायर की गई थी। इसे सिर्फ़ तिरुचि पूर्व में उपचुनाव को रोकने के उद्देश्य से दायर किया गया था। चूंकि चुनाव प्रक्रिया रुकी हुई थी इसलिए इस क्षेत्र के लाखों वोटर राज्य विधानसभा में बिना प्रतिनिधित्व के रह गए हैं जो उनके तर्क के अनुसार जनहित के खिलाफ़ है। उन्होंने यह भी कहा कि उन लोगों की ओर से पीआईएल दायर नहीं की जा सकती जिन्होंने पांच निर्वाचन क्षेत्रों में विधायकों की चुनावी जीत को चुनौती दी थी।

श्री विजय ने विशेष रूप से तिरुचि पूर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव में 20 उम्मीदवार खड़े हुए थे और जिस व्यक्ति ने चुनाव याचिका दायर की थी उसे सीधे तौर पर विजेता घोषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसलिए चुनाव आयोग के लिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत खाली सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक है।

यह बताते हुए कि इन पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में कई उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ था और मामला सिर्फ़ दो उम्मीदवारों के बीच का नहीं था, श्री विजय ने व्यापक जनहित में रोक हटाने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि न्यायालय खर्च के साथ पीआईएल खारिज कर दे, ताकि चुनाव आयोग इन पांचों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उपचुनावों की घोषणा कर सके।

उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने 24 अगस्त को उच्च न्यायालय को बताया था कि जब तक चुनाव से जुड़ी लंबित याचिकाओं का निपटारा नहीं हो जाता तब तक पांच सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा करने की उनकी कोई योजना नहीं है। साथ ही, तमिलनाडु सरकार की ओर से विधानसभा में इन सीटों का प्रतिनिधित्व न होने का हवाला देते हुए सुनवाई में तेज़ी लाने की अपील के बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

सात सीटों में से छह अन्नाद्रमुक के पास थीं और एक श्री विजय के पास। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सभी सात सीटों को खाली घोषित कर दिया और चुनाव आयोग को इसकी जानकारी भी दे दी जिससे इन सीटों पर उपचुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया। पांच सीटों पर उम्मीदवारों की जीत को चुनौती देते हुए चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं।

पिछली सुनवाई 10 जुलाई को हुई थी जिस दौरान न्यायालय ने चुनाव आयोग और दूसरे पक्षकारों केंद्र सरकार, तमिलनाडु विधानसभा के सचिव और मुख्यमंत्री विजय को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा। साथ ही, न्यायालय ने चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक चुनाव कराने से रोक दिया; बाद में इस रोक को 24 अगस्त और फिर आठ सितंबर तक बढ़ा दिया गया।

श्री विजय के इस्तीफ़े के बाद तिरुचि पूर्व की सीट खाली हो गई; मुख्यमंत्री ने दो सीटों से जीत दर्ज की थी और उन्होंने चेन्नई की पेरम्बूर सीट अपने पास रखने का फ़ैसला किया था। वहीं, अम्बासमुद्रम सीट मौजूदा विधायक एसक्की सुब्बैया के कारण खाली हुई और पेरनदुरई सीट मौजूदा विधायक एस. जयकुमार के पद छोड़ने के बाद खाली हुई।

अन्नाद्रमुक की विधायक सुश्री मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा के अपने पद छोड़ने के बाद मदुरंतकम और धारापुरम की सीटें खाली हो गईं। पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए विधानसभा में श्री विजय द्वारा लाए गए विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने के बाद अपनी सीटें छोड़ने वाले सभी छह अन्नाद्रमुक अब टीवीके में शामिल हो गए हैं।

 

 

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