ग्वालियर: सिटी सेंटर में रहने वाली लेखिता सिंघल पिछले कुछ वर्षों से गाय के गोबर की राखी बना रही हैं. हर बार की तरह यूं तो इस बार भी आज रक्षाबंधन के त्योहार पर महंगी-महंगी राखियों से बाजार सजे हुए हैं, लेकिन अबकी बार इस त्यौहार पर भाइयों की कलाई पर हर्बल राखी भी देखने को मिल रही है. इन राखियों को तैयार करने के लिए लगभग 150 महिलाओं का समूह बनाने में जुटा रहा. जिसमें कुछ ग्वालियर में तो कुछ वन्य क्षेत्र के इलाकों में बनाई गईं.
आदिवासी महिलाओं को भी मिलता है काम
इस अभियान के पीछे दो मकसद हैं एक- देसी नस्ल की ऐसी गाय, जिन्हें दूध न देने के कारण लोग छोड़ देते हैं, उन्हें बचाना. दूसरा वन्य क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी ग्रामीण महिलाओं को उनके घर पर ही रोजगार के अवसर मुहैया कराना है. गोकृति से जुड़ीं महिलाएं अपने घरों पर ही इस तरह की सामग्री तैयार करती हैं. सामग्री की फिनिशिंग, रंगाई और पैकेजिंग करने के बाद लोगो, मार्केटिंग का काम वन बंधु परिषद से जुड़ी महिलाएं करती हैं.
