
बागली। बागली नगर के मध्य 1979 मे जन सहयोग से तात्कालिक नगर परिषद द्वारा नाटक मंचन एवं धार्मिक आयोजन के लिए गांधी चौक मंच का निर्माण किया इसके पूर्व यहां पर समीप में रहने वाले दिवंगत रामचंद्र जी मोदी द्वारा अस्थाई रूप में ओटले का निर्माण किया समीप में ही प्राचीन भैरू महाराज मंदिर पर भी दिवंगत श्याम सुंदर सोनी और अन्य भक्तों द्वारा दीपक लगाए जाने का सिलसिला जारी रहा उस वक्त बागली में सर्व मंगल क्रीड़ा मंडल नाम का युवाओं का सक्रिय संगठन था। जिसमें बागली नगर के कई युवा जुड़े हुए थे। हर बार पारितोषिक वितरण करने में अस्थाई मंच बनाने की समस्या का हल स्थाई रूप से करने के लिए उन्होंने एक पहल रखी और सभी से जन सहयोग लिया जानकारी में आया है।
कि उस वक्त दिवंगत रामचंद्र जी मोदी एवं एक अन्य दानदाता द्वारा 1500/1500 रु दान करके इसकी शुरुआत की थी। कालांतर में जन सहयोग से यहां पर एक चबूतरे का निर्माण हुआ जिसका सभी की सहमति से गांधी चौक नाम रखा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि अप्रैल 81 में इसी मंच पर संयुक्त सरकार में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने कैलाश जोशी का अभिनंदन करते हुए उन्हें एंबेसडर कर भी भेंट की थी। कालांतर में गांधी चौक में रामायण रामलीला महाभारत आर्केस्ट्रा संगीत मुकेश रफी किशोर आदि की याद में संगीत सभा और अन्य ऐतिहासिक कार्यक्रम यहां होते रहे। बागली के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर एम एस उदावत ने बताया कि उस समय गांधी चौक से सम्मान मिलना लाल किले से सम्मान मिलने के बराबर था। तात्कालिक युवा साथी राजेश बजाज विनय बोथरा जगदीश गुप्ता कमल सोनी बंटी शर्मा महेश सोनी आदि ने बताया कि बागली में हर कार्यक्रम की रूपरेखा मंच को केंद्रित करके ही बनाई जाती थी। इसी स्थान से सभी आंदोलन की शुरुआत होती इसी स्थान पर समाप्ति होती चाहे ईद मिलन समारोह हो या दशहरा मिलन समारोह या होली मिलन समारोह गांधी चौक सभी उत्सव में केंद्र बिंदु रहता बागली क्षेत्र के प्रसिद्ध से निर्माता घीसालाल डाबी ने बताया कि पहली बार 1983 में ऑर्केस्ट्रा टीम गांधी चौक पर आई तब भीड़ देखने काबिल थी। जितनी जनसंख्या बागली की थी उतनी ही संख्या सुनने वालों की थी इसके बाद नवदुर्गा उत्सव गणेश उत्सव गरबा उत्सव और अन्य कार्यक्रम यहां संचालित होते रहे।
सेवानिवृत शिक्षक बंशीधर सिसोदिया ने पुरानी याद ताजा करते हुए कहा कि इस स्थान पर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी से जुड़े दिग्गज नेता सभा कर चुके वही साधु संतो में शामिल साध्वी ऋतंभरा उमा भारती सतं केशव दास जी महाराज रामाधार जी पंडित और कई वरिष्ठ जैन संत आचार्य रत्न सुंदर सुरीश्वर जी इस मंच पर धार्मिक उद्बोधन दे चुके मुस्लिम समाज के वरिष्ठ कासम अली ने बताया कि इस स्थान पर कव्वाली एवं मुशायरा भी बेहतर रूप से संपन्न हुआ है ।वही कबीरपंथी इंदर पाचौरिया ने कहा कि यह स्थान विश्व प्रसिद्ध गायक प्रहलाद टिपानिया एवं शमीम बीरमानी और कैलाश खेर के भजनों का भी साक्षी रहा। विगत दिनों बागली नगर परिषद द्वारा इसकी खतरनाक अवस्था को देखते हुए इसे जमींदोज कर दिया और फिर से नई ऊर्जा के साथ इस स्थान पर नया निर्माण होगा लेकिन बचपन से पचपन तक साथ निभाने वाले गांधी चौक के टूटने का बहुत लोगों को दुख है।
