काठमांडू, 27 अगस्त (वार्ता) नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक आयी बाढ़ में कम से कम 162 लोगों की मौत हो गयी है, जबकि करीब 400 लोग लापता हैं। इनमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। बाढ़ ने तीन जिलों में बड़े पैमाने पर निजी और सरकारी संपत्ति को तबाह कर दिया और इसे हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक माना जा रहा है। बताया गया है कि भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के प्रवाह को हिमस्खलन से अवरुद्ध होने के बाद अचानक पानी का भारी दबाव बना और बाढ़ ने सबसे पहले चीन की सीमा से लगे रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लिया। सैकड़ों लोगों की आबादी वाला यह इलाका देखते ही देखते बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ गया। क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण लोगों को किसी बड़ी बाढ़ की आशंका नहीं थी और वे रोजमर्रा के काम में लगे थे।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ में नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं तबाह हो गयी हैं। इसके अलावा 19 मोटर योग्य पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गये हैं। निजी और सरकारी संपत्ति को हुए कुल नुकसान का अभी आकलन नहीं हो सका है। नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका-7 के अध्यक्ष रवींद्र नेपाल ने बताया कि सोले से अक्करे बाजार तक सैकड़ों मकान बाढ़ में नष्ट हो गये हैं। कई लोग सुरक्षित स्थानों तक पहुंच गये, लेकिन बड़ी संख्या में बुजुर्ग और बच्चे अभी लापता हैं। स्थानीय निवासी गोकरण अधिकारी ने बताया कि उनके गांव में लगभग कुछ भी नहीं बचा है और अधिकांश परिचित लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं।
आपदा के बाद समय पर चेतावनी नहीं मिलने को लेकर भी सवाल उठे हैं। रसुवा जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार उन्हें तिब्बत से उत्पन्न बाढ़ के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीमा पार आपदा की तत्काल सूचना उपलब्ध होती तो जान-माल का नुकसान कम किया जा सकता था। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर प्रारंभिक तौर पर बताया कि रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व, तिब्बत में हिमस्खलन के कारण ल्हेंदे नदी में मलबे के साथ बाढ़ आयी।
पूर्व एनडीआरआरएमए प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि नेपाल और चीन के बीच ऐसी आपदाओं के लिए सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल आपदा के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे समय रहते जान बचायी जा सके। बाढ़ के बाद नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग और चीन के मौसम प्रशासन के अधिकारियों के बीच बुधवार को ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद चीन ने सहमति जताई कि अपनी ओर पानी का स्तर बढ़ने पर वह नेपाल को तत्काल सूचना देगा। नेपाल और चीन ने 2019 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपात प्रतिक्रिया में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। इसमें सूचना साझा करने, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, प्रशिक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण परियोजनाओं समेत नौ क्षेत्रों में सहयोग का प्रावधान है।
Thu Aug 27 , 2026
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