नई दिल्ली, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उन्होंने जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर लगाए गए प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़े पत्रों का संज्ञान लिया है। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि किसी भी मौजूदा न्यायाधीश पर लगे आरोपों का निपटारा मीडिया बहसों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए ही सख्ती से किया जाना चाहिए।
पत्रों में लगाए गए गंभीर आरोप
गौरतलब है कि जस्टिस संदीप मेहता ने अपने पत्रों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ की शक्तियों के दुरुपयोग और चुनिंदा मामलों को अपनी बेंच में भेजने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने राजस्थान से बाहर के किसी अन्य न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया था। इस पर सीजेआई ने कहा कि केवल आरोप लगने मात्र से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है।
जांच और निष्पक्ष प्रक्रिया
जारी बयान के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच उचित स्तर पर की जा रही है, जिसमें जस्टिस मेहता द्वारा दी गई जानकारी और जस्टिस शर्मा के जवाब दोनों को शामिल किया जाएगा। संबंधित अधिकारी सभी तथ्यों और साक्ष्यों की पूरी तरह जांच करने के बाद ही आगे की कोई प्रशासनिक या स्थानांतरण से जुड़ी कार्रवाई तय करेंगे।

