गौशाला तोड़ने को लेकर संतो ने दी आंदोलन की चेतावनी

रतलाम। ग्राम रत्तागढख़ेड़ा में गौशाला तोडऩे को लेकर अब विवाद बढ़ गया है। इस मामले में अब संत समाज ने आंदोलन की चेतावनी दी है। संतो ने कहा अगर अतिक्रमण था तो इतने सालो तक प्रशासन क्यों आखें मुंदे रहा।

महामंडलेश्वर आंनदगिरीजी और पंचदशनाम अखाड़े के नरेन्द्रगिरीजी ने प्रेसवार्ता कर कर कहा कि अतिक्रमण के हम भी खिलाफ है लेकिन रत्तागढ़ खेड़ा में एक गौशाला नही तोड़ी गई बल्कि सनातन पर भी हमला किया गया है। जनता की पाई पाई जोड़ी गई राशि से जो निर्माण हुआ उसे मिट्टी में मिला दिया गया।

महामंडलेश्वर आंनदगिरी जी ने कहा कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से कुछ अराजक तत्वों ने लोगो को भडक़ाया है। इसके बाद गौमाता के लिए चल रहे गौअभ्यारण और आश्रम के संत गोकर्ण को बदनाम करने की साजिश की गई। संतो ने कहा इसे ध्वस्त करने के बजाय इसे ग्राम पंचायत या प्रशासन अपने कब्जे में ले सकते थे। इस संपत्ति को अन्य किसी संस्था को देकर गौशाला का संचालन सुचारू किया जा सकता था।

ग्रामवासी खुद लेकर आए थे: संतो ने कहा जिस जगह गौशाला का संचालन कर रहे थे, उस वो जगह वीरान थी, गंदगी और गड्डो से भरी पड़ी थी। ग्रामवासी खुद गोकर्ण महाराज को लेकर आए। गोकर्णजी ने उस जगह को समतल, व्यवस्थित , और चेतन्य बनाया। वहां पर गौमाता का पालन पोषण हो रहा था। ग्राम पंचायत ने बाकायदा ग्राम सभा में वर्ष 2025 में गौशाला के संचालन पर कोई आपत्ति नही होने का प्रस्ताव पारित कर चुकी थी। उल्लेखनीय है कि कुछ ग्रामीणों की शिकायत के बाद यहां चल रही गौशाला के बाद प्रशासन ने मंगलवार को गौशाला को धराशायी कर दिया और यहां की गायो को बिरमावल में शिफ्ट कर दिया। संतो ने कहा अगर गुलाब गोकर्ण महाराज का कोई दुर्व्यसन है तो सबूत प्रस्तूत करे। हम उनका साथ नहीं देगें लेकिन कुछ अपराधी किस्म के लोग ग्रामीणों को भडक़ा कर सनातन धर्म के प्रकल्पों को निशाना बना रहे।

अब आगे क्या करेगें: आंनदगिरीजी और नरेन्द्रगिरीजी ने कहा रतलाम में जल्दी ही संत सम्मेलन होगा और उसके बाद बड़ा आंदोलन किया जाएगा। रत्तागढख़ेड़ा सहित जिले भर की गोचर भूमि को अतिक्रमणमुक्त करने ,संतो की सुरक्षा के लिए सरकार से मांग करेगें। अगर सरकार के इस राज में संत दुखी होगें तो फिर राजसत्ता का अंत निश्चित है। प्रेसवार्ता में गोकर्ण महाराज सहित अन्य भी उपस्थित रहे।

 

2011 से चल रही थी गौशाला

 

संतो ने आरोप लगाया और कहा 2011 से गौशाला चल रही थी। इसके बाद से यहां कोई दिक्कत नही थी लेकिन कुछ ऐसे लोग जो यहां कब्जा करना चाहते है। कुछ लोग तो ऐसे है जिन्होने खुद सरकारी जमीन पर कब्जा कर खेती कर रहे है। जो गौशाला चल रही थी वो गोचर भूमि पर 15 सालों से चल रही थी। 15 सालों में कोई नोटिस नहीं दिया, जबकि अब चार महिने पहले नोटिस देने की कार्यवाही फिर अभी तोडऩे की कार्यवाही की गई। संतों ने कहा प्रशासन, नेताओ ने समन्वय के प्रयास नही किए और एकतरफा कार्यवाही की गई। उल्लेखनीय है ग्रामीणो ने अतिक्रमण की शिकायत कर गौशाला हटाने की मांग की थी।

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