2021 के बाद 24 तक सबसे कम बारिश इंदौर में

इंदौर: इस साल मानसूनी बारिश मालवा निमाड़ से रूठी हुई है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2021 के बाद पिछले पांच सालों सबसे कम बारिश हुई हैं. इस बारिश का आंकड़ा 430 मिलीमीटर वर्षा का बता रहा है, जो 2021 की 390 मिलीमीटर बारिश से ज्यादा है. यह बात अलग है कि इस साल पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा निमाड़ क्षेत्र में सामान्य से 20 प्रतिशत बारिश कम हुई है. इंदौर में यह आंकड़ा 22 प्रतिशत कम का बता रहा है.

इस साल मानसूनी बारिश मालवा निमाड़ क्षेत्र में सामान्य से बहुत कम दर्ज हुई है. ऐसा भी है कि कम दबाव का क्षेत्र नहीं बना है, इस बार डिप्रेशन के चार सिस्टम बने है, लेकिन उत्तरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रीवा, सागर , शहडोल, डिंडौरी की तरफ कम दबाव का क्षेत्र विकसित कर अच्छी बारिश करवा रहे हैं. पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश का आंकड़ा 2021 में 390 मिलीमीटर दर्ज किया गया था. इसके बाद इस साल बाद पिछले पांच साल में सबसे कम बारिश होने का रिकॉर्ड इंदौर में 430 मिलीमीटर यानि 17 इंच तक पहुंचा है । 24 अगस्त तक मानसूनी बारिश इस बार 8 से 10 इंच कम दर्ज हुई है। इंदौर में यह आंकड़ा 22 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा निमाड़ क्षेत्र में 20 प्रतिशत कम बारिश होना दर्शा रहा है.

अभी पश्चिम बंगाल एवं उत्तर ओडिशा, झारखंड तथा उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है. इसका प्रभाव उत्तरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर, सागर, भिंड, रीवा शहडोल डिंडौरी में बन रहा है. इसके कारण उत्तरी मध्य प्रदेश में जमकर बारिश हो रही है. पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा निमाड़ क्षेत्र में कम  के क्षेत्र की अच्छी स्थिति नहीं है. छोटे प्रभाव बनने के बाद शायद बारिश होने की संभावना बन सकती है. अगले 24 घंटों के दौरान लगभग उत्तर-पश्चिम दिशा में गंगीय पश्चिम बंगाल तथा उससे लगे उत्तर ओडिशा एवं झारखंड के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होकर आगे बढ़ने की संभावना है. ध्यान रहे कि 2021 अगस्त में 390 मिलीमीटर बारिश हुई थी, लेकिन 30 सितंबर तक इंदौर और मालवा निमाड़ क्षेत्र में 890 मिलीमीटर बारिश का आंकड़ा पहुंचा था. इसलिए अभी मानसून का 30 सितम्बर तक का समय यानि 35 दिन बाकी है.

छोटे-छोटे प्रभाव से बारिश की उम्मीद

मौसम वैज्ञानिक अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि अभी कम दबाव का क्षेत्र पश्चिमी एवं दक्षिणी मध्य प्रदेश के आसपास नहीं हैं. अभी जितना भी सिस्टम का मूवमेंट है, उसका लाभ मालवा निमाड़ को नहीं मिल पा रहा है. छोटे छोटे प्रभाव से शायद बारिश होने की उम्मीद की जा सकती है. इस बार मौसम के डिप्रेशन चार बार बने है, जो सामान्य रूप से एक या दो बार ही बनते है. इसलिए बारिश तो हो रही है, लेकिन मालवा निमाड़ क्षेत्र में इसका असर नहीं बढ़ने से बारिश नहीं हो रही है. छोटे छोटे कम दबाव का क्षेत्र पश्चिमी एवं दक्षिणी मध्य प्रदेश की तरफ बढ़े तो बनने से बारिश संभावित है.

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