जीतू ने भरे मंच से पूर्व सांसद को टोंका, व्यक्तिगत रूप से पुचकारा ..

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

नीखराजी मोबाइल मत देखो, हमारी बात भी सुनो, जैसे ही ये शब्द कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भरे मंच से कहे, ठीक वैसे ही कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मंत्री व विधायक लखन घनघोरिया, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनीता पटेल, पूर्व विधायक संजय शर्मा सहित कई कांग्रेस के दिग्गज सकते में आ गए। मामला जबलपुर से सटे नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा के ग्राम सूखाखैरी में आयोजित किसान-मजदूर महाचौपाल, कार्यकर्ता सम्मेलन से जुड़ा है जिसमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र, राज्य सरकार पर भी निशाना साधते हुए कई तंज कसे।

हुआ यूं कि एक तरफ जीतू पटवारी आरोपों के साथ केंद्र, प्रदेश सरकार पर निशाना साध रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ कार्यक्रम में मौजूद पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा अपने मोबाइल में व्यस्त नजर आए जिसके बाद जीतू ने जो उन्हें कहा वो सार्वजनिक हुआ और सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद इस पूरे मामले ने सुर्खियां भी बटोरीं। दूसरी तरफ भरे मंच से पूर्व सांसद को टोकने वाली बात पर स्थानीय भाजपा नेता चुटकियां लेते देखे गये। चर्चाएं भी आम हुईं कि जिस पार्टी के भीतर वरिष्ठता का सम्मान, अनुशासन न हो वो विरोध की क्या बात करते हैं।

खबर है कि कार्यक्रम के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा को व्यक्तिगत रूप से पुचकारते हुए कहा कि मेरा मकसद आपको नीचा दिखाने का बिल्कुल नहीं था आप मेरी बात का दूसरा मतलब मत निकालिएगा। इस पर पूर्व मंत्री व विधायक लखन घनघोरिया भी जीतू का समर्थन करते हुए रामेश्वर नीखरा को ये समझाते हुए नजर आए कि आप आक्रोशित नहीं होना, ये सब चलता है। लेकिन कुछ भी हो, भले ही रामेश्वर नीखरा ने इस बात को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया हो लेकिन चर्चा है कि वह अंदरूनी तौर पर जीतू पटवारी की इस हरकत को पचा नहीं पा रहे हैं और आहत महसूस कर रहे हैं। जीतू के बयान ने नरसिंहपुर, गाडरवारा के साथ साथ जबलपुर के भी राजनैतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरीं।

भाजयुमो अध्यक्ष ने अनुशासन को किया तार-तार….

अनुशासन के लिए प्रतिबद्ध माने जाने वाली भारतीय जनता पार्टी इन दिनों सत्ता का दंभ भरने वाले कुछ भाजपा नेताओं की वजह से दागदार होती जा रही है। सार्वजनिक कृत्य होने के बाद पार्टी के जिम्मेदारों द्वारा सिर्फ पद से हटाने की कार्रवाई ही की जाती रही है लेकिन धरातल की बात करें तो ऐसे नेता पूरी बेशर्मी से पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाजपा के दिग्गज नेताओं, मंत्रियों के बगल में तस्वीरें खिंचाने से बिल्कुल नहीं चूकते और फिर सोशल मीडिया में यही तस्वीर वायरल कर अपने प्रभाव का दंभ भरते नजर आते हैं। सवाल ये उठता है कि गंभीर कृत्य करने वाले ऐसे नेताओं के खिलाफ संगठन कोई सख्त कार्रवाई को अंजाम क्यों नहीं देता है जिससे इस तरह के नेताओं के मन में कानून या संगठन के प्रति डर बैठ सके ।

कटनी जिले के कन्हवारा कुठला में जहां अवैध खनन का विरोध करने पर भारतीय जनता युवा मोर्चा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष लखन साहू ने अपने साथियों के साथ 3 आदिवासी परिवारों पर हमला कर दिया। इस परिवार में एक गर्भवती महिला भी थी जिसे चोटें आईं हैं। हालांकि पुलिस ने भाजयुमो ग्रामीण मंडल अध्यक्ष सहित चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरु कर दी है। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने हाल ही में मुरुम और बॉक्साइट के अवैध खनन की शिकायत वन विभाग से की थी। जिसके बाद ये करतूत की गई। इस घटना से क्षेत्र में भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा है ।

प्राइवेट दुकान में मिलीं पोषण आहार की सैंकड़ों बोरियां…?

जबलपुर के घमापुर स्थित एक डॉक्टर के बोर्ड वाली दुकान के भीतर से छापे के दौराप जप्त की गईं अनाज की 140 बोरियों के मामले ने शहर में अन्य जगहों पर होने वाली कुपोषित बच्चों के पोषण आहार की कालाबाजारी पर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ये पता लगाना शुरू तो कर दिया है कि पोषण आहार की कालाबाजारी में किस किस आंगनबाड़ी कर्मचारी की मिलीभगत है। विदित हो कि मुखबिर की सूचना के बाद कुछ दिन पहले महिला बाल विकास विभाग और प्रशासन की टीम ने पुलिस के साथ घमापुर स्थित एक दुकान पर छापा मारकर करीब 140 बोरी शासकीय पोषण आहार बरामद किया था।

सर्वविदित है कि यह आहार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को वितरित किया जाता है परन्तु प्राईवेट दुकान से भारी मात्रा में पोषण आहार बरामद होने से यह साफ हो गया है कि कालाबाजारी के इस खेल में छोटे से बड़े कर्मचारी तक शामिल हैं किन्तु अपना दामन पाक साफ रखने के लिए किसी छोटे कर्मी पर भ्रष्टाचार का बम फोड़ दिया जाता है। फिलहाल इसको लेकर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने भी गंभीर चिंता व्यक्त कर दी है, मगर यह देखना दिलचस्प रहेगा कि जिले के प्रशासनिक मुखिया महज चिंतित ही रहेंगे या वास्तविक दोषी को सीखचों के पीछे भेजने में प्रभावी भूमिका भी अदा करेंगे।

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