
उज्जैन। श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर सोमवार को राजाधिराज बाबा महाकाल की चौथी और अंतिम सावन सवारी शाही ठाठ-बाट के साथ निकली। सवारी के दर्शन के लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। हर ओर हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारे गूंजते रहे। सवारी के साथ पूरा शहर शिवमय नजर आया।
सिंहस्थ 2028 के तहत शहर में जो चौड़ीकरण चल रहा है विकास कार्य चल रहे हैं उसका फायदा महाकाल बाबा की सवारी में भी मिला,उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने नवभारत से चर्चा में बताया कि चौड़ीकरण से श्रद्धालुओं को काफी जगह मिली, जिस तरह से निर्बाध तरीके से चार सवारी निकल चुकी है ऐसे में दो सवारी बाकी है 7 सितंबर को बाबा महाकाल की राजसी शाही सवारी निकलेगी।
महाकाल मंदिर से शाम करीब 4 बजे पूजन-अर्चन के बाद सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव और नंदी रथ पर उमा-महेश स्वरूप में बाबा महाकाल ने भक्तों को दर्शन दिए। चार दिव्य स्वरूपों के दर्शन के लिए सवारी मार्ग पर श्रद्धालु घंटों पहले से ही पहुंच गए थे।
सवारी महाकाल मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां शिप्रा जल से बाबा महाकाल का पूजन-अभिषेक और आरती की गई। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुन: मंदिर पहुंची। सवारी मार्ग पर घरों की छतों, गलियों और प्रमुख चौराहों से श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। कई स्थानों पर भक्तों ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया।
सावन की चतुर्थ सवारी में पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सावन की चतुर्थ सवारी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। सवारी के दौरान समिति द्वारा 11,000 पौधों का वितरण कर श्रद्धालुओं एवं आमजन को पौधारोपण के लिए प्रेरित किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। अभियान के माध्यम से प्रकृति की रक्षा, महाकाल की सच्ची भक्ति का संदेश दिया जाएगा। श्रद्धालुओं से प्लास्टिक का त्याग करने, एक पेड़ लगाने, मां शिप्रा को स्वच्छ रखने तथा निर्माल्य नदी में न डालकर निर्धारित पात्र में डालने की अपील की गई। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति का संदेश रहेगा कि आस्था भी, स्वच्छता भी—यही महाकाल की सेवा है। साथ ही जल है तो कल है, नदी है तो जीवन है एवं महाकाल के भक्त बनें, प्रकृति के रक्षक बनें के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का भाव जागृत किया गया।
आम श्रद्धालुओं के साथ कलेक्टर ने किए महाकाल के दर्शन
सावन माह के अंतिम सोमवार के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने आम श्रद्धालु एवं कावड़ यात्रियों के दल में सम्मिलित होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए तथा भगवान श्री महाकालेश्वर को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन के क्रम में रोशन कुमार सिंह ने त्रिवेणी संग्रहालय से प्रवेश करते हुए नदी के मार्ग से पंचमुखी मानसरोवर होते हुए फैसिलिटी क्षेत्र में पहुंचकर बाबा महाकाल को जल अर्पित किया। इसके पश्चात कार्तिक मंडपम् से भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन कर दर्शन क्रम पूर्ण किया। इस दौरान अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने आम श्रद्धालुओं एवं कावड़ यात्रियों से संवाद कर उनकी यात्रा एवं दर्शन के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के साथ मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक भी उपस्थित रहे।
भक्ति के साथ व्यवस्थाओं की परीक्षा
चौथी सवारी के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा और पेयजल की व्यवस्थाएं की गईं। मार्ग पर बैरिकेडिंग और पुलिस बल तैनात रहा। प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को सवारी के दर्शन कराने की व्यवस्था भी रही। श्रावण की चार सवारियों के बाद अब भादौ मास में बाबा महाकाल की दो सवारियां निकलेंगी। 31 अगस्त को पांचवीं सवारी और 7 सितंबर को राजसी सवारी निकलेगी। इस तरह महाकाल की सवारी परंपरा का अगला चरण भी श्रद्धा और भव्यता के साथ आगे बढ़़ेगा।
