स्वच्छता के दावों की खुली पोल कचरे के ढेर में सिमटी नगर परिषद की सफाई व्यवस्था

पेटलावद। नगर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच सामने आई ये तस्वीरें नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल खड़ा करती हैं। नगर के आसपास कचरा निस्तारण स्थल कचरे के ढेर में तब्दील नजर आ रहा है। चारों तरफ प्लास्टिक, पॉलिथीन, कपड़े और अन्य कचरा बिखरा है। इसी गंदगी के बीच मवेशी भोजन तलाश रहे हैं और कई हिस्सों से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। सवाल सीधा है जब सफाई व्यवस्था पर खर्च और दावे दोनों हो रहे हैं, तो जमीन पर यह गंदगी आखिर क्यों नजर आ रही है। कचरा मैदान में प्लास्टिक की थैलियां, पॉलिथीन, कपड़े और अन्य अपशिष्ट बड़ी मात्रा में खुले में पड़े हैं। हवा के साथ हल्का कचरा आसपास फैल रहा है। वहीं कचरे से उठता धुआं पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ा देता है। यदि यही हाल रहा तो स्वच्छता अभियान और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर और गहरा होता जाएगा।

कचरे में खाना तलाशते मवेशी व्यवस्था पर सवाल

कचरे के ढेर में मवेशियों का पहुंचना भी चिंता का विषय है। भोजन की तलाश में वे प्लास्टिक और दूसरे अपशिष्ट के बीच घूमते नजर आते हैं। यह दृश्य केवल गंदगी नहीं दिखाता, बल्कि कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। रहवासी और आसपास के क्षेत्र के लिए ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।

कागजों की सफाई बनाम मैदान की सच्चाई

नगर परिषद द्वारा स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर अभियान चलाए जाने की बातें सामने आती हैं, लेकिन मौके की तस्वीरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। आखिर कचरे का व्यवस्थित निस्तारण कब होगा।खुले में कचरा जमा होने और जलने की स्थिति पर निगरानी कौन करेगा।क्या जिम्मेदार अधिकारी इस तस्वीर को देखकर भी अपनी व्यवस्था को संतोषजनक मानेंगे। ये सवाल अब नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बन रहे हैं। नगरवासियों की मांग है कि नगर परिषद तत्काल मौके का निरीक्षण कर कचरे का निस्तारण करवाए और खुले में कचरा जलने की स्थिति पर प्रभावी रोक लगाए। कचरा निस्तारण की स्थायी और व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है। आखिर स्वच्छता के दावे तभी मायने रखते हैं, जब उनकी तस्वीरें कचरे के ढेर में नहीं बल्कि साफ-सुथरे शहर में दिखाई दें।

तस्वीरें पूछ रही हैं सवाल, अब जवाबदेही की बारी

इन तस्वीरों ने नगर परिषद की स्वच्छता व्यवस्था के सामने आईना रख दिया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार इस आईने में दिखाई दे रही गंदगी को कब तक नजरअंदाज करते हैं और कब मौके पर ठोस कार्रवाई दिखाई देती है।

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