
इंदौर. अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक बनाने, मौके से साक्ष्य जुटाने और पुलिस की फील्ड कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए इंदौर पुलिस को आधुनिक तकनीकी उपकरणों की खेप मिली है. इनमें फिंगरप्रिंट की जांच से लेकर पुलिसकर्मियों की कार्रवाई रिकॉर्ड करने वाले बॉडी वॉर्न कैमरे, निगरानी के लिए दूरबीन और ध्वनि स्तर मापने वाले उपकरण शामिल हैं.
पुलिस मुख्यालय भोपाल से मिले इन उपकरणों का सोमवार को पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर संतोष कुमार सिंह ने अवलोकन किया. उन्होंने अधिकारियों से उपकरणों की कार्यप्रणाली और पुलिसिंग में इनके इस्तेमाल की जानकारी ली. इसके बाद अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपकरणों का प्रशिक्षण लेकर इनका अधिकतम और जिम्मेदारी के साथ उपयोग किया जाए. पुलिस को मिले उपकरणों में फिंगरप्रिंट ऑप्टिकल कम्पेरेटर एक, सायनोएक्रिलेट फ्यूमिंग चैम्बर एक, फिंगरप्रिंट इनरोलमेंट डिवाइस 35, वेब कैमरा 188, क्यूआर कोड प्रिंटर 35, बॉडी वॉर्न कैमरा 60, दूरबीन 140 और साउंड लेवल मीटर (डेसीबल मीटर) शामिल हैं. इस दौरान मीडिया से चर्चा में पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल जरूरी है. नए उपकरणों से अपराध अनुसंधान, साक्ष्य संकलन, अपराधियों की पहचान, निगरानी और फील्ड पुलिसिंग को मजबूती मिलेगी. इस दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) राजेश सिंह, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) मयंक अवस्थी, सभी पुलिस उपायुक्त, फिंगरप्रिंट जोनल उप पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
फिंगरप्रिंट जांच होगी ज्यादा वैज्ञानिक…
फिंगरप्रिंट ऑप्टिकल कम्पेरेटर, सायनोएक्रिलेट फ्यूमिंग चैम्बर और फिंगरप्रिंट इनरोलमेंट डिवाइस का इस्तेमाल अपराध स्थल से मिले फिंगरप्रिंट साक्ष्यों के संकलन, परीक्षण और विश्लेषण में किया जाएगा. इससे संदिग्धों और आरोपियों की पहचान में पुलिस को तकनीकी मदद मिलेगी.
पुलिस कार्रवाई भी होगी कैमरे में रिकॉर्ड…
फील्ड ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को दिए जाने वाले बॉडी वॉर्न कैमरों से कार्रवाई की रिकॉर्डिंग की जा सकेगी. इससे जहां पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी. वहीं वेब कैमरा और क्यूआर कोड प्रिंटर का इस्तेमाल विभिन्न पुलिस और प्रशासनिक कार्यों में किया जाएगा. दूरबीन का उपयोग निगरानी, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कार्यों में होगा. जबकि साउंड लेवल मीटर से ध्वनि स्तर मापकर निर्धारित मानकों और नियमों के पालन की जांच में मदद मिलेगी.
