पलासी आश्रम में नियम विरुद्ध कार्य कर रही हॉस्टल अधीक्षीका फिर आ गई चर्चा में 

बागली। ट्राइबल विभाग से जुड़े जिले में 9 आश्रमों में से चार आश्रम बागली डिवीजन में संचालित हो रहे हैं। इनमें से तीन कन्याश्रम है ।एवं एक बालक आश्रम संचालित हो रहा है नियम अनुसार इन आश्रमों में हॉस्टल अधीक्षक या अधीक्षीका वर्ग 2 के शिक्षक शिक्षिकाएं होना अनिवार्य है। बागली पुंजापुरा एवं प्लासी में कन्या आश्रम है। वही उदय नगर में बालक आश्रम है हॉस्टल अधीक्षक के अलावा बच्चों को पढ़ने के लिए दो अन्य शिक्षकों की भी व्यवस्था इन आश्रमों पर शासन द्वारा रखी गई है। हाल ही में प्लासी कन्या आश्रम की हॉस्टल अधीक्षिका अनियमितता एवं स्थानीय पलकों से अनुचित व्यवहार के चलते चर्चा में है।

जानकारी में आया है कि 2019 में यही हॉस्टल अधीक्षीका पूजा राठौर सोनकच्छ विकासखंडमें गंभीर आपराधिक श्रेणी के मामले में जांच के दायरे में आ चुकी है। लगभग 2 साल तक निलंबित रहने के बाद इनसे ट्राइबल विभाग द्वारा हॉस्टल अधीक्षीका उक्त प्रभार लेते हुए विभाग द्वारा ही इन्हें कमलापुर हाई सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ कर दिया था। पूर्व में हुई अनियमिता जांच के दौरान गंभीर दोषी पाते हुए तात्कालिक कलेक्टर द्वारा सख्त टिप्पणी करते हुवे संबंधित विभाग को हिदायत दी गई कि भविष्य में इनके पास कभी भी कोई हॉस्टल अधीक्षक का प्रभार नहीं रहना चाहिए इसी दौरान उनकी एक वेतन वृद्धि भी रोक दी गई 6 वर्षों के बाद इन्होंने जानकारी छिपाते हुए तात्कालिक जिला संयोजक के. के. शर्मा से पलासी हॉस्टल अधीक्षक का पदभार लेकर सेवा शुरू कर दी हालांकि यह अधीक्षीका पलासी आश्रम में बहुत कम आती दिखाई देती पूरा आश्रम पदस्थ शिक्षक एवं चौकीदार के भरोसे ही संचालित हो रहा था। जिसकी शिकायत कई बार ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को की और जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान आकर्षण करवाया हाल ही में फिर शिकायत प्राप्त होने पर स्थानीय मीडिया कर्मी पलासी आश्रम में पहुंचे तब हॉस्टल अधीक्षिका को भी परिसर में नहीं पाया इस संबंध में बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि मैडम नहीं है। और रात्रि में भी मैडम यहां नहीं रहती रसोई बनाने वाली बाई सोती है ।

वह भी रात्रि में कभी-कभी चली जाती है ऐसी स्थिति में बच्चों को अकेले ही सोना पड़ता है। उन्होंने इस संबंध में समाचार का प्रकाशन किया लेकिन उल्टा उन मीडिया कर्मियों पर ही हॉस्टल अधीक्षिका द्वारा बेहूदगी भरा इल्जाम लगाकर संबंधित थाना क्षेत्र काटा फोड थाने में शिकायत लिखित आवेदन के माध्यम से दर्ज करवादी जबकि समाचार बनाते वक्त वहां पढ़ाने वाले तो शिक्षक शिक्षा विभाग एवं एक शिक्षिका ट्राइबल विभाग और हॉस्टल अधीक्षक उपस्थित नहीं थे। जबकि कन्या आश्रम में सभी शिक्षकों का अध्यापन कार्य करवाना अनिवार्य है। थाने पर दिए गए शिकायती आवेदन के माध्यम से गंभीर आरोप संबंधित मीडिया कर्मी पर लगाकर उल्टा उसे ही ब्लैकमेल करने की साजिश रची गई जब यह बात पत्रकार संघ को पता लगी तो उन्होंने शुक्रवार को बागली मुख्यालय पर आकर एसडीओपी बागली को ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई शिकायत की उच्च स्तरीय जांच की जाए और संबंधित मीडिया कर्मी पर लगाए गए आरोप से उन्हें मुक्त किया जाए यदि ऐसा ही चलता रहा तो कोई भी मीडिया कर्मी किसी भी स्कूल परिसर या कन्या आश्रम या छात्रावास में चल रही क्रुरता एवं अनियमिता को उजागर नहीं कर पाएगा साथ ही बताया कि जब 2019 में तात्कालिक कलेक्टर द्वारा इनके संबंध में लिखित रूप से विभाग को अवगत करा दिया था । कि भविष्य में कभी भी इन्हें हॉस्टल अधीक्षक का पद नहीं दिया जाएगा फिर किस नियम से ग्रामीण क्षेत्र पलासी जो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। उक्त कन्या आश्रम स्थान पर इन्हें पहुंचाया विगत कई दिनों से की जा रही ग्रामीण पालकों की शिकायत पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई पत्रकार संघ ने मांग करते हुए कहा कि तात्कालिक कलेक्टर के उस आदेश के पालन में तत्काल रूप से पलासी हॉस्टल अधीक्षक का पद से इन्हें हटाकर अन्य महिला शिक्षीका की पोस्टिंग पलासी कन्या आश्रम पर की जाए एवं उनके कार्यकाल की पूरी तरह से वित्तीय जांच और सामग्री उपलब्धता की भी जांच होना चाहिए।

*क्या कहना है जिला संयोजक नीरज अब्राहिम का*

वर्तमान में जो प्रकरण मेरे समक्ष में आया है उसमें संबंधित पत्रकार द्वारा आश्रम शाला में बालिकाओं के अध्यापन कक्ष/शयनकक्ष/आदि के विडियो के साथ खबर प्रकाशित की गई है। इसके संबंध में छात्रावास अधीक्षिका द्वारा थाने में आवेदन दिया गया है। शीघ्र ही प्रकरण में सभी तथ्यों को गंभीरता से परीक्षण करते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी। पत्रकारों की ओर से दिए गए आवेदन पर भी गौर किया जाएगा।

Next Post

काँवण रूट को लेकर बना असमंजस बातचीत से सुलझा

Mon Aug 24 , 2026
जबलपुर। शहर में सावन के अंतिम सोमवार पर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पारंपरिक धार्मिक यात्राएं निकाली जा रही थीं। इसी दौरान मिलौनीगंज क्षेत्र में आश्रम खेरमाई मंदिर की तरफ जाने वाले रास्ते को लेकर आयोजकों के बीच रूट संबंधी भ्रम उत्पन्न हो गया। सूचना मिलते ही […]

You May Like