विंध्य में बारिश का कहर और तबाही का मंजर

विंध्य की डायरी

डा. रवि तिवारी

आषाढ़ में समूचा विंध्य सूखे की चपेट में रहा, किसान पानी के लिये तरस रहे थे और सावन में एक दिन ऐसी बारिश हुई कि समूचा विंध्य बाढ़ की चपेट में आ गया. बारिश का कहर और तबाही के मंजर के बीच केवल चारो तरफ पानी और लोगों की उजड़ी गृहस्थी दिखाई दी. चित्रकूट से लेकर सिंगरौली तक जीवन दायनी नदियां उफान पर रहीं और अपने साथ सब कुछ समेट ले गई. रीवा में बीहर, टमस और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप देखने को मिला. यह कोई पहली बार नहीं है रीवा शहर कई बाढ़ देख चुका है. लोगों के घर बह गये सामान तक नही समेट पाए, बच्चों को लेकर राहत शिविरों में शरण ली. हजारों परिवार का सपना पानी के साथ बह गया. जान माल दोनों का नुकसान इस बाढ़ में हुआ है. बाढ़ से उभरने में परिवारों को समय लगेगा. पीडि़तों का आंसू तो हर कोई पोंछ सकता है पर जिम्मेदार लोगो को इस बाढ़ के नियंत्रण के लिये भी सोचना होगा.

बाढ़ के लिये नदी-नाले ही नही बल्कि हम भी जिम्मेदार है. उनके आंगन में हमने कब्जा किया तो पानी घर में ही भरेगा. दो दिन तक समूचा विंध्य बाढ़ के चपेट में रहा, चारो तरफ केवल बेबसी का मंजर देखने को मिला. नदी से सटी बस्तियां एवं रिहायशी इलाकों में पानी भरने से सब कुछ डूब गया. सवाल यह उठता है कि शहर में आई बाढ़ के लिये आखिर जिम्मेदार कौन है. नदी नालों के पानी निकास पर अतिक्रमण एवं निकासी प्रबंधन का न होने सबसे बड़ा कारण है. अगर शासन-प्रशासन नहीं चेता तो हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ेगा. आपदा के इस संकट में प्रदेश के मुखिया डा. मोहन यादव बाढ़ का जायजा लेने रीवा पहुंचे, पीडि़त परिवारों से मिलकर उन्हे आपदा की इस घड़ी में ढाढस बंधाया और बगैर देरी किये सर्वे मुआवजा के लिये अफसरों को निर्देशित भी किया. हर बार आ रही बाढ़ के मुख्य कारण को भी जानने का प्रयास स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अफसरों से किया.

खीचतान में फिर अटकी सूची

भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्षों की सूची एक बार फिर अटक गई है. विंध्य के तीन जिलों के नाम अभी तक फाइनल नहीं हो पाए है. रीवा, सिंगरौली एवं मैहर के जिला अध्यक्षों का नाम अधर में लटके है. स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच खीचतान एवं आपसी सहमति न बन पाने के कारण सूची अटकी हुई है. हालाकि हाल ही में संगठन ने चरणबद्ध तरीके से कई नये जिला अध्यक्षों और महामंत्रियों के नामों की घोषणा की है. दरअसल संतुलन बैठाने के फेर में विंध्य के तीन जिलों के नामों की घोषणा नही हो पाई है. स्थानीय नेताओं के बीच नाम तय करने की प्रक्रिया और गुटबाजी के चलते सूचियां रूक-रूक कर जारी हो रही है. तीनों जिलों से लगभग नाम जिला अध्यक्षों के फाइनल है. इसी तरह महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष की भी घोषणा नहीं हो पा रही है. रीवा व अन्य जिले का मामला फसा हुआ है, जबकि अन्य जिलों में घोषणा कर दी गई है. इस माह के अंत में प्रदेश कार्य समिति की बैठक है, ऐसे में माना जा रहा है कि बैठक से पहले शेष जिलों की सूची जल्द ही जारी कर दी जाएगी.

चुरहट तक ट्रेन का ट्रायल, श्रेय लेने की होड़

ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना की आधारशिला आज से 43 साल पहले रखी गई थी. लेकिन अभी तक परियोजना पूरी नहीं हो पाई. लम्बे समय बाद हाल ही में सीधी के चुरहट रेलवे स्टेशन तक ट्रेन का सफल ट्र्रायल हुआ. उम्मीद है कि जल्द ही सीधी तक ट्रेन का सफर आसान होगा. ट्रायल के बाद श्रेय लेने के दावे शुरू हो गये है. जिसको लेकर राजनीतिक गलियारे में एक नई चर्चा शुरू हो गई है. पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं म.प्र के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह ने विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने के लिये ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना को धरातल पर लाने में बेहद निर्णायक और ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी. अब 43 साल बाद सपना साकार हो रहा है. रीवा के बाद अब सीधी तक रेल गाड़ी पहुंचने वाली है. वर्षों से चल रही इस परियोजना के लिये सभी सांसदों ने अपने-अपने स्तर पर प्रयास किये. लेकिन ट्रायल के बाद आपस में ही श्रेय लेने की होड़ मची है. बेशक 2014 के बाद से रेल परियोजना को लेकर तेजी से काम हुआ है. सीधी के जो भी सांसद रहे उन्होंने अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किये. इसी का परिणाम है कि चुरहट तक ट्रायल हो चुका है.

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