सतना:एक ओर जहां पूर्व में सामने आ चुके कुछ घटनाक्रमों के जरिए मादक पदार्थों तस्करी के लिए सतना का इस्तेमाल कैरिंग एण्ड फारवर्डिंग सेंटर के तौर पर होने की आशंका जाहिर की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर हालिया प्रकरण इसकी तस्दीक करता भी नजर आने लगा है. ताजा मामले में मुंबई निवासी 2 युवकों को नशीली दवा की खेप लेकर रेलवे स्टेशन को जाते हुए पुलिस ने दबोच लिया. जिनसे मिली जानकारी के आधार पर 1 स्थानीय पेडलर को भी पकड़ लिया गया.मुखबिर की सूचना पर शहर के रामना टोला क्षेत्र से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाली गली में जब कोतवाली थाने की टीम ने घेराबंदी की तो 2 युवक बैग लेकर जातते नजर आए.
पुलिस को सामने देखकर दोनों पहले तो सहम गए और फिर वहां से भागने का प्रयास करने लगे. लेकिन जब पुलिस ने उनका पीछा कर दबोचते हुए उनके पास मौजूद बैग की तलाशी ली तो उसमें नशे में इस्तेमाल होने वाली कफ सीरप की 61 शीशियां पाई गईं. वहीं पुलिस ने जब पूछताछ शुरु की तो दोनों युवकों की पहचान सूरज वर्मा 20 वर्ष निवासी अंबेडकर नगर मुंबई और शिवम राजभर उर्फ बादी 19 वर्ष निवासी मानखुर्द मुंबई के तौर पर हुई. पुलिस की पूछताछ में दोनों युवकों ने आगे बताया कि आदर्श नगर हवाई पट्टी निवासी उदय सिंह उर्फ प्रिंस 19 वर्ष से उन्होंने इन नशीली दवाओं को खरीदा था. यह जानकारी मिलते ही एक पुलिस टीम को उदय की तलाश में लगा दिया गया. लिहाजा कुछ देर बाद ही चीकू प्वाइंट बजरहा टोला के निकट से उसे भी दबोच लिया गया.
सोर्स की अनदेखी क्यों?
ऐसा नहीं है कि जिले की पुलिस द्वारा नशीली दवाओं को पकडऩे की कार्रवाई नहीं की जाती है. लेकिन अमूमन देखने में यही आता है कि नशा बेचने वाले कुछ स्थानीय पेडलरों को छोटी से खेप के साथ गिरफ्तार कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है. ताजा मामले में ही देखा जाए तो नशीली दवा की खेप लेने के लिए युवक मुंबई से सतना कैसे पहुंच गए. क्या इसके पीछे कोई नेटवर्क काम कर रहा है. मुंबई से आए युवकों को सतना निवासी जिस युवक ने 61 शीशी नशीली कफ सीरप बेची थी, आखिर उसे यह खेप कहां से मिली. लिहाजा पुलिस की समूची कार्रवाई महज सतही स्तर पर सिमटी नजर आती है.
