इंदौर: राऊ क्षेत्र में साझेदारी फर्म से जुड़े विवाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत के आदेश पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया है. आरोप है कि साझेदारी में खरीदी गई करीब तीन करोड़ रुपए की जमीन में सेवानिवृत्त भागीदार को उसका हिस्सा नहीं दिया और फर्म से जुड़े दस्तावेजों व संपत्ति में भी हेरफेर की गई.
मामला मारवी कन्फेक्शनर्स नाम की साझेदारी फर्म से जुड़ा है. परिवादी मुरलीधर सेवानी के अनुसार वर्ष 2014 से वह कविकुमार गवलानी के साथ साझेदारी में कारोबार कर रहे थे. वर्ष 2016 में दोनों ने मिलकर राऊ क्षेत्र में करीब 40 हजार वर्गफीट जमीन खरीदी थी. जमीन का सीमांकन, बटांकन और डायवर्शन आदि प्रक्रिया वर्ष 2022 तक पूरी की गई.
इसके बाद जमीन का मूल्य करीब तीन करोड़ रुपए बताया. परिवादी का आरोप है कि जमीन में उसने भी आधी रकम लगाई थी, लेकिन साझेदारी से अलग होने के बाद उसे केवल उसके खाते की पूंजी लौटाई गई और जमीन में उसका हिस्सा नहीं दिया. आरोप यह भी है कि कविकुमार गवलानी ने अपने भतीजे सागर गवलानी को फर्म में भागीदार बनाकर चाचा भतीजे ने मिलकर फर्म की प्लांट मशीनरी, स्टॉक और फर्नीचर समेत अन्य संपत्ति तथा जमीन के हिस्से को बेचने का प्रयास किया.
मुरलीधर ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन मामला दर्ज नहीं होने पर अदालत का रुख किया. अदालत ने शिकायत के साथ पेश साझेदारी डीड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया. न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता अग्रवाल ने पुलिस को शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच के निर्देश दिए. अदालत के आदेश के बाद राऊ पुलिस ने कविकुमार गवलानी और सागर गवलानी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. न्यायालय ने पुलिस को 15 दिन में अनुसंधान पूरा कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. परिवादी की ओर से अधिवक्ता केपी माहेश्वरी ने पैरवी की. उनका कहना है कि साझेदारी में खरीदी गई संपत्ति में परिवादी के हिस्से को नहीं दिया और दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी किए जाने की शिकायत अदालत के समक्ष रखी गई थी.
