जबलपुर: व्यवहार न्यायाधीश अपर्णा सोनी ने व्यवहार वाद में वादी राजेंद्र कुमार बेन के पक्ष में आदेश पारित करते हुए प्रतिवादी रांझी जबलपुर निवासी साजन भिलोदिया सहित अन्य की ओर से प्रस्तुत अस्थायी निषेधाज्ञा स्टे का आवेदन निरस्त कर दिया।वादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि प्रतिवादीगण विवादित भूमि पर कब्जा कर रहे हैं व निर्माण और अन्य गतिविधियों के जरिए उनके आधिपत्य में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वादी के अनुसार संबंधित भूमि वर्ष 1960 और 1961 के बैनामों के माध्यम से खरीदी गई थी।
बाद में शेष भूमि भी प्रतिवादी पक्ष के स्वजनों से खरीदी गई थी। विवादित भूमि पर पूर्व में बने मकान के जर्जर होने के बाद प्रतिवादीगण द्वारा नींव पर कालम खड़े कर गेट लगाने का आरोप भी लगाया गया। वादी की ओर से यह भी बताया गया कि सात अक्टूबर 2025 को उनके पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित हो चुका है, जिसके तहत प्रतिवादीगण को वादग्रस्त भूमि पर वादी के शांतिपूर्ण आधिपत्य में हस्तक्षेप करने से रोका गया है।
न्यायालय ने पाया कि प्रतिवादीगण द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और नक्शे विवादित भूमि की स्थिति को स्पष्ट नहीं करते। साथ ही प्रथम दृष्टया मामला आवेदक के पक्ष में नहीं पाया गया व सुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति का आधार भी सिद्ध नहीं हुआ। न्यायालय ने गोपाल नारायण विरुद्ध मप्र शासन 1979 में प्रतिपादित सिद्धांत का उल्लेख करते हुए आदेश 39 नियम 1 व 2 सहपठित धारा 151 व्यवहार प्रक्रिया संहिता के तहत आवेदन निरस्त कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का वाद के अंतिम निराकरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
