
बागली। सीएमएचओ देवास डॉ. सरोजिनी जेम्स बेक के निर्देशानुसार एवं ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अमित नागर के परिपालन में बागली सिविल अस्पताल में 20 अगस्त को मच्छर जनित रोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. हेमन्त पटेल ने कहा कि हम सब मिलकर मलेरिया बीमारी को खत्म कर सकते हैं। आम नागरिक यदि जागरूक हो जाए तो आसपास क्षेत्र में मच्छरों की उत्पत्ति वाले कारणों को नष्ट करते हुए एवं सुरक्षित उपाय धारण करते हुए इनके प्रहार से बच सकते हैं। समय रहते इलाज से भी इस स्थिति की रोकथाम संभव है। मच्छर जनित एवं मच्छर रचित बीमारियों के कारण प्रतिवर्ष हजारों लोग दुनिया छोड़ देते हैं।
यह थीम वैश्विक स्तर पर मलेरिया के खिलाफ तत्काल और मिलकर कदम उठाने का आह्वान करती है। इसके तहत विज्ञान, नए टीकों और बेहतर उपचार के जरिए इस बीमारी को हमारे जीवनकाल में खत्म करने की संभावना स्पष्ट दिखाई दे रही है।
*डॉ. दिनेश सोलंकी ने बताया कि* मानव शरीर को संक्रमित करने वाले मलेरिया के चार मुख्य प्रकार प्लास्मोडियम परजीवी की प्रजातियों पर आधारित हैं – प्लास्मोडियम वाइवैक्स, प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम, प्लास्मोडियम ओवेल और प्लास्मोडियम मलेरियाई।
मच्छर रात में इसलिए काटते हैं क्योंकि सूरज की तेज धूप और गर्मी उनके शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) पैदा कर सकती है। इसके अलावा रात के समय उनका घ्राण तंत्र (गंध सूंघने की क्षमता) और प्रोटीन स्तर सक्रिय हो जाता है, जिससे उन्हें ठंडे वातावरण में इंसानों की गंध और कार्बन डाइऑक्साइड ढूंढने में आसानी होती है।
*मलेरिया निरीक्षक धर्मदास देवड़ा ने शपथ दिलाई -* उन्होंने बताया कि केवल मादा मच्छर ही खून चूसती हैं। उन्हें अपने अंडे देने के लिए खास प्रोटीन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो वे फूलों के रस से पूरी नहीं कर पातीं।
एक मादा मच्छर एक बार में लगभग 100 से 200 (कुछ प्रजातियों में 300 तक) अंडे देती है। वह हर दिन अंडे नहीं देती, बल्कि खून का आहार लेने के बाद हर 2 से 3 दिन में एक बार अंडे देती है। इस प्रकार एक मादा अपने जीवनकाल में कुल 3 से 5 बार अंडे देती है।
*बचाव के उपाय -*
1. अपने घर के आस-पास पानी जमा न होने दें।
2. कूलर, गमलों और टंकियों के पानी को नियमित रूप से साफ करें।
3. सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी बांह के कपड़े पहनें।
4. स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें और साफ-सफाई को आदत बनाएं।
*रक्त समूह से जुड़ा तथ्य -* वैज्ञानिक शोधों के अनुसार ब्लड ग्रुप O (O पॉजिटिव या O नेगेटिव) वाले लोगों को अन्य ब्लड ग्रुप (A या B) की तुलना में लगभग दोगुना ज्यादा मच्छर काटते हैं।
भारत में मच्छरों की 400 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें से करीब 31 प्रजातियाँ ऐसी हैं जो इंसानों में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियाँ फैलाती हैं।
कार्यक्रम के अंत में सुपरवाइजर नंदकिशोर मोहवाल ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर नर्सिंग ऑफिसर योगिता योगी, सुपरवाइजर भगत राठौड़, किशोर मंडलोई, चित्रा कौशल, अनिल धाकरे, अनिल जोशी, सुरेश वाजपेय, मेहरू वास्केल, संजय जोशी, बालमुकुंद नागर, राजेश गुर्जर, चन्दर सिंह, रतन जामले सहित सभी स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे
