
शाजापुर, मोहन बड़ोदिया तहसील के ग्राम करजू में जल निकासी की व्यवस्था न होने से करीब 70 बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है. जलभराव के कारण 8 से 10 किसानों की फसलें पूरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है.
ग्राम निवासी कैलाश नारायण ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जनसुनवाई में आवेदन दिया. उन्होंने बताया कि खेतों में लगातार पानी भरे रहने से न केवल फसलें नष्ट हो रही हैं, बल्कि खेत की उपजाऊ मिट्टी भी खराब हो रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पानी निकासी का मार्ग बनाने की गुहार लगाई. इसके बाद दोपहर में करीब दो दर्जन किसान मोहन बड़ोदिया तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार दिव्या जैन से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई. किसानों ने खेतों से पानी निकालने की तुरंत व्यवस्था करने की मांग रखी. इस पर तहसीलदार दिव्या जैन ने किसानों को आश्वस्त किया कि दो दिनों के भीतर समस्या का समुचित समाधान करा दिया जाएगा.
शेड क्षतिग्रस्त, खुले में हो रहा अंतिम संस्कार
वहीं ग्राम निपानिया धाकड़ गांव में शमशान शेड क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों को बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा. मंगलवार को गांव के बहादुर सिंह के निधन पर परिजनों और ग्रामीणों ने यह अंतिम संस्कार किया. इस घटना का एक वीडियो सामने आया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से शमशान शेड के शीघ्र निर्माण की मांग की है. गांव में शमशान घाट की बदहाली पर सरपंच संदीप पटेल ने बताया कि वर्तमान में जहां अंतिम संस्कार होता है, वह निजी भूमि है और वहां खड़े रहने तक की पर्याप्त जगह नहीं है. पंचायत के पास कोई शासकीय भूमि न होने के कारण नए श्मशान का निर्माण रुका हुआ है. सरपंच संदीप पटेल के अनुसार शासकीय भूमि आवंटन के लिए राजस्व विभाग को आवेदन दिया गया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही जमीन चिन्हित होगी, तुरंत श्मशान शेड का निर्माण कराया जाएगा.
