
नीमच। जिले के मनासा तहसील क्षेत्र के ग्राम कंजार्डा निवासी किसान हीरालाल मालवीय ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जनसुनवाई के दौरान आत्मदाह का प्रयास किया। किसान ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और प्रशासनिक स्तर पर न्याय नहीं मिलने से परेशान होकर अपने ऊपर डीजल छिडक़ लिया। घटना के बाद जनसुनवाई स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए किसान को रोका और उसके हाथ से माचिस छीन ली।
100 से अधिक बार अधिकारियों के चक्कर लगाने का दावा
किसान हीरालाल मालवीय का आरोप है कि सर्वे नंबर 701 में स्थित उसकी पुश्तैनी जमीन पर पड़ोसी भू-स्वामी गलत सर्वे नंबरों की आड़ लेकर करीब 12 आरी भूमि पर जबरन निर्माण कर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। किसान का कहना है कि वह इस मामले में न्याय की मांग को लेकर 100 से अधिक बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा चुका है, लेकिन अब तक उसे संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
किसान ने आरोप लगाया कि कलेक्टर के निर्देश के बावजूद मनासा तहसील के अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा ऐसी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिससे उसे ही गलत साबित किया जा रहा है। लगातार कार्रवाई नहीं होने से परेशान होकर उसने जनसुनवाई के दौरान यह कदम उठाया।
पुलिस ने समय रहते रोका
किसान द्वारा खुद पर डीजल डालने की जानकारी मिलते ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे तत्काल रोका। पुलिस की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। इसके बाद किसान ने कलेक्टर से पूरे मामले में स्वयं मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
एडीएम बोले- सात बार हो चुका है सीमांकन
मामले को लेकर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) बीएल कलेश ने बताया कि किसान की शिकायत प्रशासन के संज्ञान में है। उनके अनुसार एसडीएम द्वारा गठित राजस्व दल अब तक सात बार जमीन का सीमांकन करा चुका है। सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर किसान अपने वास्तविक रकबे पर ही काबिज पाया गया है।
एडीएम के मुताबिक किसान निर्धारित सीमा से अधिक जमीन पर अपना दावा कर रहा है, जिसके कारण वह सीमांकन की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है।
संवेदनशील मामले में फिर से होगी विस्तृत जांच
हालांकि किसान की लगातार असहमति और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने विवाद को एक बार फिर गंभीरता से लिया है। एडीएम बीएल कलेश ने एसडीएम को पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच दोबारा कराने के निर्देश दिए हैं।
अब जांच के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जमीन के सीमांकन और कब्जे को लेकर किसान की शिकायत में कितनी वास्तविकता है। वहीं, किसान ने प्रशासन से मौके पर जाकर जांच कराने और उसे न्याय दिलाने की मांग की है।
