नयी दिल्ली, 18 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उपकरण शासन व्यवस्था को तेजी से बदल रहे हैं।
डॉ. ह ने मंगलवार को लेटरल एंट्री के माध्यम से नियुक्त संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए आयोजित 15 दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलते प्रशासनिक वातावरण में अधिकारियों को जिज्ञासु और निरंतर सीखने वाला बने रहना होगा। उन्होंने कहा कि यह रिफ्रेशर कोर्स केवल व्याख्यान सुनने का मंच नहीं, बल्कि दोतरफा संवाद, सीखने और अनुभव साझा करने का अवसर है। सिविल सेवकों के लिए बदलती तकनीक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप निरंतर सीखते रहना और अपने ज्ञान एवं कौशल को अपडेट करना आवश्यक है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पाठ्यक्रम में नीति विश्लेषण, डिजिटल परिवर्तन, नगरपालिका वित्त, सार्वजनिक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और सरकारी संचार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी संचार का दायरा अब केवल सरकार के भीतर संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें जनता के साथ प्रभावी संवाद भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने प्रभावी संचार को जिम्मेदार शासन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों को चार स्तरों पर संवाद करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। इनमें सरकारी अधिकारियों एवं सहकर्मियों, राजनीतिक पदाधिकारियों, मीडिया और आम नागरिकों के साथ संवाद शामिल है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया सहित संचार के बदलते माध्यमों के दौर में विभिन्न हितधारकों तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाना अधिकारियों के लिए पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उभरती तकनीकों और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल सरकार की प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ अधिकारियों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों और सरकारी संस्थाओं की गरिमा को भी बनाये रखना होगा। सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी निगरानी को आसान बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया है।
डॉ. सिंह ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) जैसे संस्थानों की पहुंच बढ़ाने और समान उद्देश्यों के लिए काम करने वाले अन्य संस्थानों एवं एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार केंद्र और राज्य सरकारों, सार्वजनिक संस्थानों तथा निर्वाचित निकायों तक किया जाना चाहिए। उन्होंने कॉरपोरेट और निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों के लिए भी पाठ्यक्रम विकसित किए जाने की बात कही।
उन्होंने अधिकारियों से खुले और सीखने की भावना वाले दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षण में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शासन की बदलती प्रकृति को देखते हुए लोक प्रशासन में निरंतर पेशेवर विकास, संवाद और सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
