अंधविश्वास की आड़ में 68 वर्षीय महिला की हत्या, ‘डाकन’ बताकर उतारा मौत के घाट, चार आरोपी गिरफ्तार

अलीराजपुर। चन्द्रशेखर आजादनगर थाना क्षेत्र के ग्राम सेजावाड़ा में 68 वर्षीय वृद्ध महिला को ‘डाकन’ बताकर हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने महिला को उसके परिवार में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार मानते हुए पहले उसके साथ विवाद और मारपीट की तथा बाद में घर में सोई अवस्था में उसके सिर पर भारी एवं बुथरी वस्तु से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को कंबल में लपेटकर बोरे में भरकर बांधा गया और टेम्पो से ले जाकर तालाब में फेंक दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

 

पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर श्री रघुवंश सिंह भदौरिया ने बताया कि मृतिका कालीबहन पति मक्का भाई डामोर, उम्र 68 वर्ष, निवासी सेजावाड़ा चौकी फलिया थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अजय हटीला की माता की करीब 5-6 माह पूर्व मृत्यु हुई थी तथा घटना से लगभग 5-7 दिन पहले उसके भाई संजय की भी मृत्यु हुई थी। आरोपी अजय को अपने भाई की मृत्यु के संबंध में मृतिका कालीबहन पर संदेह था। इसी संदेह के चलते आरोपियों ने मृतिका को ‘डाकन’ बताते हुए उसके साथ विवाद एवं मारपीट की थी।

 

जांच के अनुसार घटना के समय कालीबहन अपने घर में सो रही थी। इसी दौरान आरोपियों ने उसके सिर पर भारी एवं बुथरी वस्तु से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को कंबल में लपेटकर बोरे में भरकर बांध दिया गया। शव को टेम्पो से तालाब की ओर ले जाते समय आरोपियों में से एक आरोपी आगे-आगे चलकर रास्ते की रेकी कर रहा था, ताकि शव ले जाते समय किसी व्यक्ति की नजर उन पर न पड़े। इसके बाद शव को सेजावाड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित तालाब में फेंक दिया गया।

 

तालाब में मिली कंबल में लिपटी पोटली से खुला राज

 

15 अगस्त 2026 को मृतिका के परिजनों को जानकारी मिली कि ग्राम सेजावाड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित तालाब के पास पानी में नीले रंग के कंबल में लिपटी एक पोटली पड़ी है, जिसमें शव होने की आशंका है। परिजन मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से पोटली को तालाब से बाहर निकाला। कंबल खोलने पर उसमें कालीबहन का शव मिला।

 

सूचना मिलने पर पुलिस ने मर्ग क्रमांक 68/2026 धारा 194 बीएनएसएस के तहत जांच प्रारंभ की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओपी जोबट श्री आशुतोष ने घटनास्थल का निरीक्षण कर थाना प्रभारी चन्द्रशेखर आजादनगर निरीक्षक शिवराम तरोले को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 

बेटी के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या की पुष्टि

 

मर्ग जांच के दौरान मृतिका की पुत्री रमीला पति मुकेश संगाड़िया, उम्र 32 वर्ष, निवासी दाहोद, गुजरात के बयान लिए गए। उसने बताया कि घटना से कुछ दिन पहले उसकी मां ने फोन पर जानकारी दी थी कि अजय हटीला, राजेश हटीला, मुकेश मावी, नरू मावी एवं दिनेश मावी उसके घर आए थे तथा उसे ‘डाकन’ बताते हुए विवाद एवं मारपीट की थी।

 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतिका की मृत्यु सिर पर किसी भारी एवं बुथरी वस्तु से चोट लगने तथा मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव होने के कारण होना पाया गया। उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के कथनों एवं जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करते हुए अपराध क्रमांक 354/2026, धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत विवेचना शुरू की।

 

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 17 अगस्त को चार आरोपी गिरफ्तार

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री रघुवंश सिंह भदौरिया के निर्देशन में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर श्रीमती ज्योति उमठ बघेल एवं एसडीओपी जोबट श्री आशुतोष के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी निरीक्षक शिवराम तरोले के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई।

 

गठित टीम ने मर्ग जांच, गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने लगातार प्रयास करते हुए 17 अगस्त 2026 को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

 

गिरफ्तार आरोपियों में—

 

1. अजय हटीला पिता नानिया हटीला, निवासी सेजावाड़ा चौकी फलिया।

2. राजेश हटीला पिता मंगा हटीला, निवासी सेजावाड़ा चौकी फलिया।

3. मुकेश मावी पिता सारेसा मावी, निवासी सेजावाड़ा चौकी फलिया।

4. नरू मावी पिता रामू मावी, निवासी सेजावाड़ा चौकी फलिया।

 

इनकी रही सराहनीय भूमिका

 

आरोपियों की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी निरीक्षक शिवराम तरोले, चौकी प्रभारी सेजावाड़ा सउनि जयवीरसिंह भदौरिया, सउनि मंजित, प्रधान आरक्षक दिलीप, प्रधान आरक्षक राकेश सिंगाड़, आरक्षक विशाल, आरक्षक विजय एवं आरक्षक भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही सायबर पुलिस टीम का भी सराहनीय योगदान रहा।

 

अंधविश्वास के खिलाफ समाज के लिए गंभीर चेतावनी

 

यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि समाज में आज भी मौजूद अंधविश्वास और कुप्रथाओं के खिलाफ गंभीर चेतावनी है। किसी बीमारी, मृत्यु अथवा पारिवारिक परेशानी के लिए किसी व्यक्ति को ‘डाकन’ बताना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून की नजर में गंभीर अपराध भी है।

 

विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। पंचायतों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, स्कूलों और प्रशासन को मिलकर लोगों को यह समझाना होगा कि किसी भी अनहोनी का कारण किसी व्यक्ति को मानने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों और चिकित्सकीय जांच पर विश्वास किया जाए।

 

कालीबहन की मौत समाज के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ गई है—क्या हम अंधविश्वास के आधार पर किसी इंसान की जिंदगी का फैसला करेंगे या विज्ञान, विवेक और कानून पर भरोसा करेंगे?

 

पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने आरोपियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचा दिया है, लेकिन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समाज की सोच बदलना भी उतना ही आवश्यक है।

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