
मानवीय गरिमा और मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता के प्रतीक के तौर पर ईयू को उन पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।” बेन-ग्विर ने गाजा में बंधक रहे इजरायली नागरिक रोमी ब्रास्लाव्स्की के साथ एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा गाजा में सैन्य हमलों में कमी किये जाने के फैसले से असहमति जतायी और हर रात “लक्षित हत्याएं” किये जाने की वकालत की। श्री बेन-ग्विर ने एक इंटरव्यू में कहा था, ” मेरा मानना है कि गाजा में लक्षित हत्याएं की जानी चाहिए और हर रात 30 से 40 लोगों को खत्म किया जाना चाहिए। ”
उन्होंने कहा कि गाजा में लोग “जीने के लायक नहीं हैं” और उन्हें जीवित नहीं रहना चाहिए। उनके इस बयान की अरब मीडिया में व्यापक चर्चा हुई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना की गयी।नेतन्याहू सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका रखने वाले श्री बेन-ग्विर लंबे समय से फलस्तीनियों को लेकर अपने कड़े रुख के कारण आलोचना के घेरे में रहे हैं। वह इजरायल की पुलिस और जेल सेवाओं के प्रभारी हैं तथा सुरक्षा कैबिनेट के सदस्य हैं, जो देश की सुरक्षा और युद्ध नीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब गाजा में इजरायल की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ रही है और अरब तथा मुस्लिम देश फलस्तीनियों के खिलाफ कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले मई में कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये सहित आठ अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने बेन-ग्विर की गतिविधियों की निंदा करते हुए आगे की उकसावे वाली कार्रवाई और हिंसा भड़काने से रोकने के लिए कदम उठाने की मांग की थी।कई देशों ने हिंसा भड़काने के आरोपों में पहले ही श्री बेन-ग्विर पर प्रतिबंध या यात्रा प्रतिबंध लगाये हैं। ईयू में भी ऐसे प्रतिबंधों पर विचार हुआ है, लेकिन इसके लिए सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
वह गाजा में इजरायली बस्तियों के विस्तार और फलस्तीनियों को क्षेत्र छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने का भी समर्थन करते रहे हैं। उनकी ताजा टिप्पणी से गाजा में युद्धविराम और राजनीतिक समाधान के प्रयासों के बीच इजरायली सरकार में दक्षिणपंथी मंत्रियों के प्रभाव को लेकर चिंता और बढ़ गयी है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका गाजा में व्यापक युद्धविराम योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा में इजरायली सेना की मौजूदगी को लेकर मतभेद बातचीत में लगातार बाधा बने हुए हैं।
