
स्काईहॉप ने वित्त वर्ष 2030 तक 40 विमानों तक का बेड़ा तैयार करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अपने बेड़े में 20-25 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड सीप्लेन शामिल करने का विकल्प लेकर चल रही है। कंपनी की योजना वित्त वर्ष 2030 तक खरीद, लीज या दोनों के संयोजन के माध्यम से 10 तक नोएमी विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की है। उनका प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर कंपनी वित्त वर्ष 2030 के बाद अतिरिक्त पांच नोएमी विमानों तक के विकल्प पर भी विचार कर सकती है।
स्काईहॉप एविएशन की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अवनि सिंह ने कहा कि देश में सीप्लेन की संभावनाएं केवल एक गंतव्य को दूसरे से जोड़ने तक सीमित नहीं हैं। विशाल समुद्र तट, द्वीप, नदियां और झीलें ऐसे क्षेत्रों को जोड़ने के तरीके में बुनियादी बदलाव ला सकती हैं, जहां पारंपरिक हवाई अड्डे का बुनियादी ढांचा बनाना मुश्किल या अव्यावहारिक है। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड विमान इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं, खासकर छोटी क्षेत्रीय उड़ानों के लिए। उन्होंने बताया कि कंपनी भविष्य में देश में ही इन विमानों के निर्माण एवं असेंबली की संभावनाओं पर भी विचार करेगी।
नोएमी एरोस्पेस के संस्थापक एवं सीईओ एरिक लिथुन ने कहा, “हम देख रहे हैं कि भारत सीप्लेन रणनीति को वास्तविकता में बदलने के लिए प्रयास कर रहा है। यह एक मजबूत बाजार की शुरुआत है। सरकार की महत्वाकांक्षा मजबूत है, नये सीप्लेन मार्गों के लिए एक बड़ा कार्यक्रम है और अब स्काईहॉप अपने बेड़े के निर्माण की तैयारी कर रहा है। हमें स्काईहॉप के साथ मिलकर भारत में बन रही इस गति पर बहुत गर्व है।”
स्काईहॉप के परिचालन का पहला चरण लक्षद्वीप के द्वीपों को आपस में और मुख्य भूमि से जोड़ने पर केंद्रित होगा। कंपनी की योजना 19-सीटर ट्विन-ऑटर सीप्लेन के जरिये परिचालन शुरू करने की है। इससे पहले सार्वजनिक क्षेत्र की हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता पवन हंस ने भी इसी महीने की शुरुआत में नोएमी एयरोस्पेस के साथ अगली पीढ़ी की हरित विमानन प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक सीप्लेन समाधानों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया था। प्रस्तावित सहयोग का उद्देश्य इलेक्ट्रिक सीप्लेन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण, तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान तथा कार्यशालाओं का आयोजन और व्यवहार्यता अध्ययन है।
