भारत वर्ष के पवित्र तीर्थों के जल से श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी का जलाभिषेक

(विनय असाटी)

बांदकपुर/दमोह। श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी मंदिर परिसर में चल रहे 11 दिवसीय लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक के सातवें दिवस मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल पाठक शास्त्री महाराज के मार्गदर्शन में भगवान श्रीदेव जागेश्वर नाथ का देश के विभिन्न पवित्र तीर्थों व जलस्रोतों सहित 12 नदियों के जल से विधिविधानपूर्वक

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ताप्ती ,महानदी,सरयू मड़कोलेश्वर संगम,सहित विभिन्न पवित्र नदियों तथा समुद्र और इमरती कुंड के पावन जल को एकत्रित कर यज्ञ मंडप में स्थित यज्ञशाला में भगवान शिव का लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। साथ ही मंदिर ट्रस्ट के गोवर्धन धेनु पर्वत पर वृक्षारोपण किया गया। रुद्राभिषेक के सातवें दिवस श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी का पूजन किया मंदिर ट्रस्ट के मंत्री पंकज हर्ष श्रीवास्तव श्रीमती अनीता श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव श्रीमती भावना श्रीवास्तव ,जलज श्रीवास्तव श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव , मृदुल श्रीवास्तव श्रीमती अंकिता ने यजमान के रूप में बैठकर विधिविधान से वैदिक आचार्यों व ब्राह्मणों द्वारा शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रोच्चार के बीच भगवान आशुतोष का अभिषेक किया गया। मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल पाठक शास्त्री ने बताया कि श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का एक विशेष स्वरूप यह भी है कि देश के विभिन्न तीर्थों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु वहां से पवित्र जल लेकर आते हैं श्रद्धालु तीर्थों से लाए गए जल को सर्वप्रथम मंदिर परिसर स्थित इमरती कुंड में अर्पित करते हैं और उसके बाद उसी पवित्र जल से श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी का जलाभिषेक करते हैं उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की मान्यता के अनुसार इमरती कुंड में भारतवर्ष के विभिन्न पवित्र तीर्थों का जल समाहित होता रहा है, जिसके कारण यह कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है उन्होंने कहा कि इसी परंपरा के अंतर्गत आज भारतवर्ष के विभिन्न तीर्थों से श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए पवित्र जल को इमरती कुंड में अर्पित करने के पश्चात उसी तीर्थजल की पवित्रता के भाव से यज्ञशाला में भगवान श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी का लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक किया गया। तीर्थयात्रा से लाया गया जल जब भगवान शिव के चरणों में समर्पित होता है। तो श्रद्धालु स्वयं को उस तीर्थयात्रा के आध्यात्मिक पुण्य से जुड़ा हुआ अनुभव करता है आज अमावस्या होने के कारण श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी अनुमानतः लगभग सुबह से रात्रि 10 बजे तक 35 हजार श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी के दर्शन किए और जलाभिषेक कर अपनी श्रद्धा अर्पित की ट्रस्ट के प्रवक्ता आचार्य पंडित रवि शास्त्री महाराज ने कहा कि

लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सनातन संस्कृति, तीर्थ परंपरा और वैदिक धर्माचार के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता उत्पन्न करना भी है तीर्थों से जल लाकर भगवान शिव को समर्पित करने की परंपरा श्रद्धालुओं को भारत की विशाल आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है भगवान श्रीदेव जागेश्वर नाथ जी से देश, प्रदेश, समाज व समस्त मानवता के कल्याण की कामना की मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मंदिर की धार्मिक मर्यादा बनाए रखते हुए अनुशासनपूर्वक दर्शन एवं जलाभिषेक करें और लघु रुद्रात्मक रुद्राभिषेक के इस पावन आयोजन में श्रद्धाभाव से सहभागी बनें।

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