जबलपुर: मध्य प्रदेश में प्रैक्टिस अधिवक्ता को वेरिफिकेशन कराए बिना राज्य अधिवक्ता परिषद तथा बार एसोसिएशन के चुनाव करवाये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई सितम्बर को निर्धारित की गयी है।
अधिवक्ता परमानंद साहू की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि प्रैक्टिस अधिवक्ता का वेरिफिकेशन करवाये बिना बार काउंसलिंग तथा बार एसोसिएशन के चुनाव कराये गये है। ऐसे किया जाना नियम के विपरीत है और चुनाव अवैधानिक है। जिसके कारण उक्त याचिका दायर की गयी है।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिताव गुप्ता ने युगलपीठ को बताया कि प्रैक्टिस एडवोकेट रूल्स 2015 के तहत वेरिफिकेशन आवश्यक है। जिससे यह पता लगाया जा सके की कितने अधिवक्ता की मृत्यु हो गयी है और कितनों ने वकालत का पेशा छोड दिया है। वेरिफिकेशन के आधार पर प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता की सूची तैयार की जाती है। मध्य प्रदेश बार एसोसिएशन का वेरिफिकेशन साल 2016 में करवाया गया था। इसके बाद कोई वेरिफिकेशन नही कराया गया।
याचिका में कहा गया है कि बिना वेरिफिकेशन के मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद तथा अन्य बार एसोसिएशन के चुनाव कराये गये है। चुनाव अवैधानिक तरीके से करवाये गये है,इसलिए उन्हें निरस्त किया जाये। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद चुनाव अधिकार हाईकोर्ट बार एसोसिएशन,मध्य प्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट बार एसोसिएशन तथा जिला बार एसोसिएशन जबलपुर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
