इंदौर के शेर देश के 10 से ज्यादा चिड़ियाघरों तक पहुंचे, आकाश-मेघा ने बढ़ाया कुनबा

इंदौर: कभी इंदौर चिड़ियाघर में शेरों का मतलब था छोटा-सा केज और सलाखों के पीछे टहलता ‘अकबर’. उसे देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी. 15 जनवरी 1988 को इंदौर जू में जन्मा अकबर करीब 21 साल तक जिया और 2009 में उसकी मौत हुई. लिवर सिरोसिस और लकवे से जूझने के बावजूद वह लंबे समय तक दर्शकों का आकर्षण बना रहा. अकबर और रानी के बाद करीब तीन साल तक इंदौर जू में शेर नहीं रहे.

फिर नवंबर 2013 में एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत बिसालपुर जू से आकाश और मेघा को इंदौर लाया गया. इसके बाद सिर्फ शेर नहीं बदले, उनका पूरा ठिकाना बदल गया. शेरों के लिए करीब 6 हजार वर्गमीटर का खुला परिसर तैयार किया गया. पेड़-पौधों और प्राकृतिक संरचनाओं के साथ ऐसा वातावरण बनाने की कोशिश हुई, जहां शेर केवल पिंजरे में बंद न रहें, बल्कि घूम सकें, सक्रिय रहें और अपने स्वाभाविक व्यवहार को बनाए रख सकें. परिसर में करीब 10 शेरों को रखने की क्षमता है. यहीं से इंदौर के शेरों की कहानी ने नई करवट ली. आकाश और मेघा ने नए वातावरण में खुद को ढाला और धीरे-धीरे कुनबा बढ़ता गया. वर्तमान में यहां करीब 11 शेरों का कुनबा है.

अकबर की सलाखों से आकाश-मेघा के खुले आसमान तक
इंदौर के शेरों की यह कहानी सिर्फ संख्या बढ़ने की कहानी नहीं है. यह बदलती चिड़ियाघर व्यवस्था की तस्वीर भी है- छोटे केज से बड़े प्राकृतिक परिसर तक, सीमित गतिविधियों से खुले वातावरण तक और एक शेर की लोकप्रियता से पूरे कुनबे के संरक्षण तक. आज 20 साल के आकाश और मेघा की दहाड़ उस बदलाव की गवाही देती है. कभी अकबर को देखने के लिए लोग सलाखों के सामने जुटते थे, आज उसी इंदौर जू में शेरों का कुनबा बढ़ रहा है और यहां की नस्ल देश के दूसरे चिड़ियाघरों तक पहुंच रही है.

21 की उम्र में भी माता-पिता बनने की ताकत
शेरों की सामान्य उम्र करीब 16 से 18 वर्ष मानी जाती है, लेकिन इंदौर के आकाश और मेघा करीब 21 वर्ष की उम्र में भी स्वस्थ बताए जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस उम्र में भी दोनों ने प्रजनन किया है. चिड़ियाघर प्रबंधन इसे बेहतर आवास, पोषण और देखभाल का परिणाम मानता है.

इंदौर से देशभर में फैला कुनबा
इंदौर की कहानी केवल यहां मौजूद शेरों तक सीमित नहीं है. एनिमल एक्सचेंज पॉलिसी के तहत यहां के शेर देश के 10 से ज्यादा चिड़ियाघरों तक भेजे जा चुके हैं इनमें कई जगह इंदौर से गए शेरों की ब्रीडिंग भी हुई और उनकी नई पीढ़ी तैयार हुई. यानी जिस इंदौर जू में कभी अकबर के बाद शेरों का संकट खड़ा हो गया था, वही अब दूसरे चिड़ियाघरों के लिए शेरों की नई पीढ़ी उपलब्ध कराने वाला केंद्र बन गया है.

 

डाइट पर विशेष निगरानी
क्यूरेटर निहार पारुलेकर के अनुसार शेरों की सेहत के लिए नियमित वैक्सीनेशन के साथ उनकी डाइट पर विशेष निगरानी रखी जाती है. भोजन के साथ उनके आवास, व्यायाम, मानसिक सक्रियता और प्राकृतिक व्यवहार को भी ध्यान में रखा जाता है.

मौसम के अनुसार देखरेख
जू प्रभारी डॉ. उत्तम यादव के मुताबिक, इंदौर जू में फिलहाल 11 लायन हैं. इनमें मेघा सबसे लंबे समय से यहां रह रही है और अब तक 15 से अधिक शावकों को जन्म दे चुकी है. बड़े होने पर शावकों को एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत देश के विभिन्न चिड़ियाघरों में भेजा गया. जू में लायन को छोटे पिंजरों की जगह जंगलनुमा बड़े बाड़ों में रखा जाता है, जिनकी देखरेख मौसम के अनुसार की जाती है

Next Post

तेज बारिश के बीच उज्जैन पहुंची मालवा अंचल की सबसे बड़ी बोल बम कावड़ यात्रा

Tue Aug 11 , 2026
बागली: मालवा अंचल की सबसे बड़ी एवं ऐतिहासिक बोल बम कावड़ यात्रा सोमवार को नरवर से पूजा-अर्चना के बाद बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंची। नरवर से यात्रा प्रारंभ होने से पहले तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के बीच भी कावड़ यात्री पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ […]

You May Like