
इंदौर । “न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ करना” विषय पर मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का रविवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में समापन हुआ। कॉन्फ्रेंस में न्यायपालिका, शासन, विधिक सेवा संस्थाओं और अन्य संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने न्याय को अधिक सुलभ, समावेशी और जन-केंद्रित बनाने पर विचार-विमर्श किया।
कॉन्फ्रेंस में मध्यस्थता, सामुदायिक विवाद समाधान, जनजातीय एवं वन समुदायों, बच्चों, बंदियों और उनके परिवारों तक न्याय की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। पहले दिन मध्यस्थता और वंचित समुदायों तक विधिक सेवाओं की पहुंच पर चर्चा हुई, जबकि दूसरे दिन बाल-अनुकूल न्याय, बच्चों के संरक्षण-पुनर्वास तथा बंदियों और उनके परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्समावेशन पर मंथन हुआ।
इस दौरान विधिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए शिक्षा के अधिकार संबंधी योजना, थीम सॉन्ग का भारतीय सांकेतिक भाषा संस्करण, हिंदी में योजनाओं का संस्करण, ब्रेल गाइड , मध्यस्थता प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का प्रवेश पोर्टल, “ और न्याय के स्वर जैसी पहलों का शुभारंभ किया गया।
पास्को मामलों में पीड़ित-केंद्रित एवं बाल-अनुकूल दृष्टिकोण, प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व, प्रतिकर और मनोसामाजिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। वहीं, बंदियों के लिए विधिक सहायता के साथ पुनर्वास, परिवार से पुनः जुड़ाव, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों को न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पैरा-लीगल वालंटियर्स और जेल लोक अदालतों की भूमिका मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
कॉन्फ्रेंस के समापन पर न्यायपालिका, विधिक सेवा संस्थाओं, शासन, सिविल सोसायटी और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि गरीबी, दिव्यांगता, सामाजिक असुरक्षा, भौगोलिक दूरी या जागरूकता के अभाव के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। कॉन्फ्रेंस का संदेश रहा कि न्याय सुलभ, समावेशी, गरिमापूर्ण और जन-केंद्रित होना चाहिए।
