
सना/रियाद (वार्ता) यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जीज़ान शहर में सऊदी अरामको की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला करने की जिम्मेदारी ली है। हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई। सऊदी के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, अग्निशमन दल ने समय रहते आग पर पूरी तरह काबू पा लिया और इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हूती समूह ने इसे यमन के सादा और हज्जा प्रांतों पर हुए सऊदी ड्रोन हमलों का जवाब बताया है। यह हमला सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए ‘मक्का रक्षा समझौते’ के ठीक एक दिन बाद हुआ है। हूती अधिकारियों ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि तुर्किये या पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं या किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल होते हैं, तो उन्हें इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों का यह कदम नए गठबंधन को सीधा संदेश देना और सऊदी के प्रमुख तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
अरामको पर हमले के साथ ही हूती विद्रोहियों ने यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित ‘अल-मखा’ बंदरगाह पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। यह बंदरगाह यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि हमले में सऊदी सैनिकों और उनके हथियारों के डिपो को निशाना बनाया गया, जिससे भारी नुकसान हुआ और कई लोग हताहत हुए। वहीं, बंदरगाह के निदेशक ने कहा कि मिसाइलों ने परिसर के नागरिक इलाकों को नुकसान पहुँचाया है। इसके अतिरिक्त, यमन के मारिब, ताइज़ और हदरामाउत क्षेत्रों में भी हूती विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच भीषण झड़पें जारी हैं, जिससे बीते 12 सालों से जारी यह संघर्ष और गहरा गया है।
