सतना: जिला पंचायत की शिक्षा समिति इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर घिरती नजर आ रही है. समिति द्वारा लगातार दर्जनों बैठकें आयोजित करने के दावों के बावजूद, शिक्षा विभाग में हुए लगभग 7 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के गंभीर मामले पर अब तक कोई ठोस चर्चा या प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है.
जिला पंचायत उपाध्यक्ष और शिक्षा समिति की सभापति की अध्यक्षता में कई विषयगत बैठकें हुईं, लेकिन जब बात करोड़ों के इस घोटाले की आई तो पूरी प्रक्रिया सिर्फ आश्वासनों और जांच के दिखावे तक ही सिमट कर रह गई.
जांच कमेटी का गठन सिर्फ कागजों तक सीमित?
मामला सामने आने के बाद शिक्षा समिति ने आनन-फानन में एक जांच कमेटी गठित की थी. हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि सालों बीत जाने के बाद भी इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश ही नहीं की। रिपोर्ट दाखिल न होने के कारण दोषियों के खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं हो पाई है.
समिति के सदस्यों पर भी उठे गंभीर सवाल
जांच रिपोर्ट में हो रही अकारण देरी के चलते अब शिक्षा समिति के सदस्य भी संदेह के दायरे में हैं. क्षेत्र में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े आर्थिक अनियमितता के मामले में जांच रिपोर्ट दबाकर क्यों रखी गई और किसकी शह पर कार्रवाई को अटकाया जा रहा है?
इनका कहना
शिक्षा समित ने जांच कमेटी बनाई थी उन्होंने रिपोर्ट नहीं पेश किया जिसके कारण वैधानिक कार्यवाही नहीं हो सकी.
शैलेंद्र सिंह
जिला पंचायत सीईओ
