नैनीताल, 07 अगस्त (वार्ता) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मसूरी नगर पालिका परिषद में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी एवं आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन में कटौती पर अंतरिम रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने नगर पालिका परिषद को निर्देश दिया है कि अंतिम निर्णय होने तक कर्मचारियों को वही वेतन दिया जाए, जो आठ जून 2026 के आदेश से पहले मिल रहा था। अदालत ने इस प्रकरण पर 05 अगस्त को सुनवाई की लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हो पायी।
खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश देवेंद्र प्रसाद एवं अन्य की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभांग डोभाल ने पक्ष रखते हुए कहा कि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने आठ जून 2026 के आदेश के जरिए दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि उनकी नियुक्ति नियमित चयन प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थी।
याचिका में कहा गया कि कर्मचारी पिछले दस वर्षों से अधिक समय से न्यूनतम वेतन प्राप्त कर रहे हैं और नियमित कर्मचारियों के समान कार्य एवं दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे में वेतन में कटौती करना अवैध है। याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह (2017) तथा जग्गो बनाम भारत संघ (2024) के फैसलों का भी हवाला दिया।
न्यायालय ने मामले को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार एवं अन्य प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक मसूरी नगर पालिका परिषद याचिकाकर्ताओं के वेतन में आठ जून 2026 के आदेश के आधार पर कोई कटौती नहीं करेगी और उन्हें पूर्ववत वेतन का भुगतान जारी रखा जाएगा।
