वॉशिंगटन, अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने एक प्रतिष्ठित पत्रिका में अपने लेख के माध्यम से पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करना केवल उस जमीनी हकीकत को स्वीकार करना है, जिसे पाकिस्तान ने अपने गलत आचरण से वर्षों पहले ही नष्ट कर दिया था।
आतंकवाद और संधि की विफलता
क्वात्रा ने कहा कि 1960 में हुई यह संधि ‘सद्भावना और मित्रता’ की भावना पर आधारित थी, लेकिन पाकिस्तान ने दशकों तक सीमा पार आतंकवाद और युद्धों के जरिए इस भावना को पूरी तरह से कुचल दिया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का यह कड़ा कदम पूरी तरह से न्यायसंगत है।
पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते
भारतीय राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख को दोहराते हुए कहा कि अब आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान को अपनी विफलताओं का ठीकरा भारत पर फोड़ने के बजाय अपने खराब जल प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।

