वाशिंगटन, 02 अगस्त (वार्ता) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए नये मौकों पर विचार करेगा और उम्मीद है कि आने वाले हफ़्तों में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत फिर से शुरू करने के लिए नये सिरे से कूटनीतिक कोशिशें होंगी। श्री रुबियो ने एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा “मुझे पता है कि आप अगले कुछ हफ़्तों में कुछ कोशिशें देखेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या हम दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू कर सकते हैं और इस युद्ध को खत्म कर सकते हैं। रूस और यूक्रेन दोनों ही अपनी दृढ़ शर्तों पर कायम हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।राष्ट्रपति ने अपनी टीम से कहा है कि अगर आपको शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद करने का कोई मौका दिखे, तो हमें वह करना चाहिए। वह हमेशा युद्ध के बजाय कूटनीति और लड़ाई के बजाय शांति को प्राथमिकता देते हैं।”
ईरान के बारे में उन्होंने कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के ज़रिए रणनीतिक संतुलन को पूरी तरह से बदल दिया है।उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ईरानी सरकार ने कभी श्री ट्रम्प जैसा राष्ट्रपति देखा है, जो असल में कार्रवाई करते हैं। अमेरिकी अभियानों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को बुरी तरह कमज़ोर कर दिया है। श्री ट्रम्प ने उनकी नौसेना को खत्म कर दिया, उनकी वायु सेना को खत्म कर दिया, उनके मिसाइल रक्षा प्रणाली को खत्म कर दिया, उनके लॉन्चर खत्म कर दिए, उनकी फैक्ट्रियां खत्म कर दीं और उनकी रक्षा क्षमताओं को बहुत कमज़ोर कर दिया।” उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान ने ईरान को बातचीत करने के लिए मजबूर किया है।
श्री रुबियो ने कहा, “यही एकमात्र कारण है कि वे अब परमाणु निरस्त्रीकरण पर समझौता करने के लिए तैयार हैं और कुछ मामलों में तो उत्सुक भी दिख रहे हैं… क्योंकि अब हम उनसे मज़बूत स्थिति से बात कर रहे हैं, कमज़ोर स्थिति से नहीं। ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका का सबसे अहम मकसद बना हुआ है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम का खतरा कभी हकीकत नहीं बन सकता। राष्ट्रपति इस बारे में बहुत स्पष्ट रहे हैं।” श्री रुबियो ने चीन के बारे में कहा कि रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद अमेरिका और चीन के साथ बातचीत जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “हम अपने रिश्तों में स्थिरता चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच बातचीत ज़रूरी है क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच कोई भी टकराव दोनों देशों और दुनिया के लिए विनाशकारी होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ताइवान को लेकर मौजूदा स्थिति में किसी भी एकतरफा बदलाव का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका स्थिति में किसी भी तरह के ज़बरदस्ती या दबाव वाले बदलाव की मुखालफत करेगा। .

