नयी दिल्ली 01 अगस्त (वार्ता) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुणे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसलों में श्री डोभाल की सलाह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा सुनेत्रा पवार और केन्द्रीय सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। श्री शाह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106 वीं पुण्यतिथि पर स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और अर्थ देने वाले उनके “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” के मंत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा,” हमारा शासन, भाषा, संस्कृति और हमारा धर्म जब प्रस्थापित होता है, तभी पूर्ण स्वराज की प्राप्ति होती है। तिलक महाराज ने स्वराज और स्वतंत्रता के आंदोलन के साथ जनता को जोड़ने का काम किया।”
उन्होंने कहा कि तिलक महाराज ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक नए प्रकार के राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जन्म दिया। उन्होंने कहा ,”तिलक महाराज ने भविष्य में देश के चलने की दिशा भी तय कर दी और कहा कि यह देश जब भी आजाद होगा इसी रास्ते पर चलेगा। आज हमारा देश सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के रास्ते पर चल पड़ा है।”
श्री शाह ने कहा कि तिलक महाराज एक शिक्षक और प्रखर पत्रकार थे। एक युग पुरुष, महान शिक्षक, निर्भीक पत्रकार, चिंतक और कर्मयोगी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के समान पूरे स्वतंत्रता संग्राम में कोई नहीं था। श्री डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार दिये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पुरस्कार कोई तमगा नहीं बल्कि लोगों को प्रेरणा देने और बड़े लोगों के काम को मान्यता देने की एक पद्धति है। उन्होंने कहा ,” कोई व्यक्ति जब समाज के किसी भी क्षेत्र में बहुत बड़ा काम करता है, तब वह व्यक्ति नहीं रह जाता बल्कि बहुत आगे निकल जाता है। समाज का उत्तरदायित्व है कि ऐसे व्यक्तियों का सम्मान करे। श्री डोभाल तिलक पुरस्कार मिलना इस देश के लिए जीने वाले और काम करने वाले हर क्षेत्र के नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत बनेगा।
श्री शाह ने कहा कि जब भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कालखंड का इतिहास लिखा जाएगा और देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की मीमांसा होगी, तब श्री डोभाल के योगदान के बारे में निश्चित रूप से एक स्वर्णिम अध्याय उसमें शामिल होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में भारत की विदेश नीति बेहद मज़बूत हुई है और सरकार की इस उपलब्धि में भी श्री डोभाल का बहुत बड़ा योगदान है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 1972 से लेकर खुफिया ब्यूरो के निदेशक बनने तक एक अधिकारी के रूप में श्री डोभाल ने देश के सामने आने वाली हर चुनौती को हल करने में अपना सक्रिय योगदान दिया। उन्होंने पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू कश्मीर, पंजाब, पाकिस्तान में रहकर अद्भुत योगदान देने का काम किया है जिसका मूल्यांकन संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में भी श्री डोभाल ने छह साल तक और बड़े महत्वपूर्ण समय में काम किया।
श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 2019 के बाद मल्टी एजेन्सी सेंटर (मैक) को मज़बूत करने का काम किया जो आज देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ है। श्री डोभाल ने ही मैक की एक मजबूत नींव रखने का काम किया। श्री डोभाल को सबसे लंबे समय तक देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहने का सम्मान भी प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की दृष्टि से भारत की सेना को आधुनिक बनाने, समसामयिक परिवर्तन करने, सेना के अंदर तकनीक और वीरता का अद्भुत सामंजस्य बनाने जैसे कई बड़े फैसले श्री डोभाल के कार्यकाल में लिए गये। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के फैसलों के पीछे श्री डोभाल के बहुत लंबे अनुभव वाली सलाह भी होती है।
