
खंडवा: क्या करोड़ों रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृतियां ही असली विकास हैं? पंधाना विधानसभा में भाजपा विधायक छाया मोरे के ढाई साल के कार्यकाल का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है। शनिवार को एक निजी होटल में आयोजित मीडिया संवाद में विधायक ने अपने रिपोर्ट कार्ड में 199 करोड़ रुपये की लागत से 450 से अधिक विकास कार्यों, 301.41 करोड़ की भाम मध्यम सिंचाई परियोजना और करोड़ों के छात्रावासों का ब्योरा रखा। विधायक ने कहा कि सिर्फ प्रशंसा नहीं, हमारी कमियां भी बताइए और सुधार का रास्ता सुझाइए, लेकिन जब बात कमियों और जमीनी हकीकत की आती है, तो तस्वीर फाइलों से बिलकुल अलग नजर आती है। बड़े-बड़े बजट पास होने के बावजूद, पंधाना की जनता आज भी कछुआ चाल से चल रहे प्रोजेक्ट्स, रोजगार के सूखे और मंडी के अभाव से जूझ रही है।
बदहाल सड़कें: विकास की थमी हुई रफ्तार
विधायक ने पंधाना-डुल्हार-खंडवा, पंधाना-राजगढ़ सहित दर्जनों सड़कों का जिक्र किया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बुनियादी ढांचे के कई काम, जैसे कि खंडवा-डुल्हार-पंधाना मार्ग और उस पर निर्माणाधीन पुलिया, इतनी धीमी गति से चल रहे हैं कि बारिश के मौसम में यह आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाते हैं। प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की सुस्ती के कारण विकास कार्य रेंग रहे हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर 50 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल और सिंगोट में 30 बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सैद्धांतिक स्वीकृति जरूर मिल गई है, लेकिन ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की भारी कमी से व्यवस्था की पोल खुल रही है।
किसानों के साथ छलावा: उद्यानिकी मंडी केवल वादों में :
विधायक ने 301.41 करोड़ की भाम मध्यम सिंचाई परियोजना को किसानों के लिए वरदान बताया और मुख्यमंत्री द्वारा घोषित प्याज आधारित औद्योगिक क्लस्टर का जिक्र किया। लेकिन पंधाना क्षेत्र, जो अरबी, अदरक और सब्जियों के उत्पादन में अग्रणी है, वहां का किसान आज भी अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए तरस रहा है। सालों से मांगी जा रही ‘उद्यानिकी मंडी’ अब तक सिर्फ खोखले वादों में उलझी है। अगर किसान अपनी उपज बेच ही नहीं पाएगा, तो सिंचाई परियोजनाओं का पूरा लाभ कैसे मिलेगा?
रोजगार का भारी सूखा: सिर्फ चर्चाओं में सिमटे उद्योग :
विधायक ने अपने विजन में रोजगार आधारित उद्योगों और नए आईटीआई संस्थानों का लक्ष्य रखा। लेकिन धरातल का कड़वा सच यह है कि युवाओं के लिए रोजगार का मुद्दा भयानक रूप ले चुका है। देशगांव के समीप प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना केवल चर्चाओं और बैठकों तक ही सीमित रह गई है। बिना उद्योगों और उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्पों के, स्थानीय युवाओं के पास पलायन करने या बेरोजगारी का दंश झेलने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।
बस स्टैंड की भारी बदहाली और बुनियादी सुविधाओं का टोटा
पंधाना में लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण स्थानीय बस स्टैंड की भारी बदहाली है, जहां बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है। करोड़ों रुपये के विकास दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि बस स्टैंड पर यात्रियों, विशेषकर महिलाओं के लिए सुलभ शौचालय जैसी न्यूनतम और अनिवार्य व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। इसके चलते यहां आने वाली महिला यात्रियों को हर दिन भारी शर्मिंदगी और परेशानी से गुजरना पड़ता है।
हाईकोर्ट खंडपीठ को इंदौर से जोड़ने की पहल सराहनीय :
मीडिया संवाद में विधायक ने बताया कि उन्होंने खंडवा और बुरहानपुर जिले को जबलपुर के स्थान पर इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ से जोड़ने की मांग को विधानसभा से लेकर राष्ट्रपति स्तर तक उठाया है। ओंकारेश्वर प्रवास के दौरान राष्ट्रपति से भी इस पर व्यक्तिगत अनुरोध किया गया। यदि यह मांग पूरी होती है, तो यह निश्चित रूप से दोनों जिलों के लाखों लोगों के लिए न्यायिक प्रक्रिया में बड़ी सुविधा होगी।
आधा कार्यकाल खत्म: अब नतीजों का इंतजार:
विधायक छाया मोरे ने निश्चित तौर पर बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने और हाईकोर्ट खंडपीठ जैसे मुद्दों को उठाने में अपनी सक्रियता दिखाई है। उन्होंने खुले मंच से आलोचना सुनने का साहस भी दिखाया। लेकिन धरातल की राजनीति में जनता केवल ‘पास हुए बजट’ या ‘सौंपे गए ज्ञापनों’ से नहीं, बल्कि पूरी हुई सड़कों, किसानों की मंडी और युवाओं को मिली हुई नौकरियों से अपने जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन करती है।
उनके कार्यकाल का लगभग आधा समय बीत चुका है। अब समय वादों का नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने का है। यदि बचे हुए समय में उद्यानिकी मंडी का निर्माण, रोजगार के नए साधनों का सृजन और अटके हुए प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं हुए, तो यह सारा विकास केवल कोरी घोषणाओं का पुलिंदा मान लिया जाएगा। पंधाना की जनता अब आश्वासन नहीं, ठोस नतीजे मांग रही है।
