सरकार ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ को दी मंजूरी

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (वार्ता) सरकार ने पांच हज़ार करोड़ करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (पीएम- एसएसवाई) को मंजूरी दी है। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने शुक्रवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (पीएम- एसएसवाई)’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 5,070 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में पांच हज़ार मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (एफएसपीवी) परियोजनाओं का विकास किया जाएगा।

इन परियोजनाओं के साथ कम से कम 10,000 मेगावाट-घंटे (एमडब्ल्यूएच) क्षमता वाली ऊर्जा भंडारण प्रणाली (एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) भी स्थापित की जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच परियोजनाओं को स्वीकृति दी जायेगी, जबकि वित्तीय सहायता का वितरण 2032-33 तक जारी रहेगा। केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) के रूप में सफलतापूर्वक चालू होने वाली प्रत्येक पात्र फ्लोटिंग सोलर परियोजना के लिए एक करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की सहायता दी जायेगी। इसके अलावा परियोजनाओं की व्यवहार्यता जांच, जल गहराई एवं हाइड्रोग्राफी सर्वेक्षण, पर्यावरणीय अध्ययन तथा अन्य प्रारंभिक तैयारियों के लिए प्रति परियोजना 50 लाख रुपये तक की सहायता भी उपलब्ध करायी जायेगी।

सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) के हालिया आकलन में देश के जलाशयों और अन्य उपयुक्त अंतर्देशीय जल निकायों में करीब 102.18 गीगावाट पीक फ्लोटिंग सौर ऊर्जा क्षमता का अनुमान लगाया गया है। यह योजना इसी संभावनाओं का उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वर्तमान में देश में फ्लोटिंग सोलर क्षमता लगभग 700 मेगावाट है, जिसे इस योजना के माध्यम से बढ़ाकर 5000 मेगावाट के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इस योजना से जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का बेहतर उपयोग होगा तथा भूमि की आवश्यकता कम होने से कृषि और अन्य उपयोगों के लिए जमीन पर दबाव नहीं बढ़ेगा। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के जुड़ने से बिजली ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। अनुमान है कि इस योजना से हर वर्ष करीब एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आयेगी और परियोजनाओं की पूरी मूल्य श्रृंखला में 16,000 से 17,000 प्रत्यक्ष एवं समकक्ष पूर्णकालिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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