इंदौर: सड़क हादसे में घायल एक अकाउंटेंट की मौत के बाद इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है. परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद न तो समय पर इलाज मिला और न ही ऐसी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई, जिससे घायल को तेजी से अस्पताल पहुंचाया जा सके. उनका कहना है कि अगर हर मिनट की कीमत समझी जाती तो शायद 50 वर्षीय अनिल आज जिंदा होते.
अनिल शुक्रवार सुबह देवास से बाइक पर इंदौर स्थित अपने कार्यालय के लिए निकले थे. मांगलिया टोल नाके के पास एक तेज रफ्तार लोडिंग वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी. गंभीर रूप से घायल अनिल को पहले नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां प्राथमिक उपचार के बजाय उन्हें एमवाय अस्पताल भेज दिया था. परिजनों ने पुलिस को बताया कि इसके बाद सबसे ज्यादा समय एंबुलेंस का इंतजार करने और फिर उससे अस्पताल पहुंचने में निकल गया.
उनका आरोप है कि जिस एंबुलेंस से अनिल को इंदौर लाया गया, उसमें हूटर और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं थीं. ट्रैफिक के बीच एंबुलेंस सामान्य वाहनों की तरह चलती रही और एमवाय अस्पताल पहुंचने में करीब सवा घंटे लग गए. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने अनिल को मृत घोषित कर दिया. अब पुलिस हादसे के लिए जिम्मेदार लोडिंग वाहन चालक की तलाश कर रही है, जबकि परिजन पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
