जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बायोकेमिस्ट्री विषय के पीजी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के आधार पर चयन प्रक्रिया में शामिल होकर अंतिम चयन सूची में स्थान पाने वाले अभ्यर्थियों की याचिकाएं स्वीकार कर लीं। इससे उनकी असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया।
याचिकाकर्ता डॉ. सुशील कुमार प्रतापति सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा ने पक्ष रखा। मामला वर्ष 2022 की एमपी पीएससी भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 2017 में बायोकेमिस्ट्री को बॉटनी-जूलॉजी के एलाइड सब्जेक्ट के रूप में मान्यता थी, लेकिन 2022 में इसे हटा दिया गया। वहीं 2025-26 की भर्ती में सरकार ने फिर इसे शामिल कर लिया। सरकार ने तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने पूछा कि 2017 व 2025 में मान्यता के बावजूद 2022 में बायोकेमिस्ट्री क्यों हटाई गई। जिसके बाद न्यायालय ने दायर याचिकाएं स्वीकार कर ली।
