
शाजापुर, सरकार ने ठेके नीलाम किए, लेकिन शराब माफियाओं ने पूरे शहर को अपनी विरासत समझकर जगह-जगह गुमटियों में शराब की बोतलें रखवाकर उनकी फ्रेंचाइजी दे दी. अस्पताल के पास, चाय की दुकान और पान की दुकान में आसानी से दारु बिक रही है मोहन बड़ोदिया शहर में. यहां तक कि पीने वालों के लिए अवैध रूप से इन दुकानदारों ने अहाते भी बना रखे हैं. ऐसा ही एक वीडियो नवभारत को मिला है, जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि आबकारी विभाग ने ही शराब माफियाओं को मोहन बड़ोदिया में चाय-पान की दुकान पर शराब बेचने की अनुमति दे दी हो. बेखौफ होकर बेची जा रही है मोहन बड़ोदिया की गुमटियों में शराब.
गौरतलब है कि शाजापुर जिले में लगभग 10 से अधिक अलग-अलग क्षेत्र में शराब के ठेेके संचालित हो रहे हैं. मोहन बड़ोदिया में सरकार ने दो दुकानें नीलाम की हैं. लेकिन मोहन बड़ोदिया में जब गुप्त कैमरे से पड़ताल की गई, तो पता चला कि बड़ोदिया में तो चाय, पान की दुकान पर शराब ऐसे मिल रही है, जैसे मानो इन दुकानों पर शराब बेचने का लाइसेंस मिल गया हो. अवैध रूप से बेची जा रही यह शराब जब पत्रकारों को नजर आ गई, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग को चाय, पान की दुकान पर बिकने वाली शराब नजर नहीं आई. इसका सीधा कारण है कि पुलिस और आबकारी विभाग को शराब ठेकेदार से लाखों रुपए की बंदी हर महीने इसलिए ही मिलती है कि पुलिस और आबकारी धृतराष्ट्र बनकर अपना काम करें.
बाहर हरी नेट, अंदर शराब…
मोहन बड़ोदिया में नलखेड़ा रोड पर खेतों के बीच चाय की गुमटी है. लेकिन अंदर इसे अहाते के रूप में संचालित किया जा रहा है. जहां आसानी से देशी और अंग्रेजी शराब मिल जाती है. खेत में बैठकर शराब पीने की भी व्यवस्था की गई है. दूसरी जगह बाजार के बीच दुकान मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र के पास हाट बाजार के मार्केट के सामने एक दुकान के बाहर खाद्य सामग्री रखी है और अंदर शराब उपलब्ध कराने और पीने की व्यवस्था है. तीसरा स्थान सारंगपुर रोड पर आरोग्य अस्पताल के पास हरी नेट लगाकर एक दुकान है, जहां खुलेआम दारु बेची और पिलाई जा रही है. ये वो स्थान हैं, जो न तो पुलिस की नजर से छिपे हैं, न आबकारी विभाग की निगाहों से, लेकिन दोनों ही विभाग धृतराष्ट्र बनकर शराब माफिया को मजबूत करने और उसके बदले लाखों की बंदी लेने में मस्त हैं.
