काठमांडू, 30 जुलाई (वार्ता) नेपाल के सुनसरी जिले में झंडा लगाने और तेज आवाज मे डीजे बजाने को लेकर दो समुदायों में हुए रविवार को हुए विवाद के बाद भड़की हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत हो गयी है और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार जिले के कप्तानगंज इलाके में हुई हिंसक झड़प में घायल और अस्पताल में भर्ती जय प्रकाश मेहता नाम (22) के युवक ने गुरुवार दोपहर को दम तोड़ दिया। उन्हें इस घटना के दौरान पेट में गोली लगी थी और वे अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे। इससे पहले झड़प के तुरंत बाद अस्पताल ले जाते समय एक अन्य युवक ओम प्रकाश मेहता (25) की मौत हो गई थी।
इस हिंसा की शुरुआत 26 जुलाई (रविवार रात) को तब हुई जब बिजली के खंभे पर लगा एक धार्मिक झंडा हटाकर दूसरा झंडा लगाने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया था। यह विवाद उस समय हिंसक झड़प में बदल गया। इसके अलावा सावन के महीने में तीर्थयात्रा की तैयारी के दौरान स्थानीय मंदिर और जुलूस के पास लाउडस्पीकर और डीजे तेज आवाज में बजाने को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई। देखते ही देखते लाठी-डंडे चलने लगे और भारी पथराव शुरू हो गया। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस ने शुरुआत में आंसू गैस व चेतावनी भरे हवाई फायर किए, लेकिन बाद में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को गोलियां चलानी पड़ीं। आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हिंसा और पथराव में 16 लोग घायल हो गए। घायलों में आठ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
सुनसरी में हुए इस उपद्रव के बाद पूर्वी तराई के अन्य इलाकों में सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। धनुषा और सिराहा के जिला प्रशासन कार्यालयों ने गुरुवार को चुनिंदा क्षेत्रों में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया। इसके तहत लोगों की आवाजाही, सार्वजनिक सभाओं, प्रदर्शनों, रैलियों और अन्य गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने देवांगनज, हरिनगर, भुटाहा और कप्तानगंज सहित प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू व निषेधाज्ञा लागू कर दी गयी है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना की टुकड़ियों को तैनात किया गया है।
सुनसरी हिंसा का यह मामला गुरुवार को नेपाल की प्रतिनिधि सभा (संसद) में भी जोरों से गूंजा। विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय करने और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ने से रोकने की मांग की। विपक्ष के सांसदों ने सरकार और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह पर स्थिति को सही ढंग से न संभालने और जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया। वहीं, सत्ता पक्ष के सांसदों ने संयम बरतने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मतभेदों को भुनाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। इस दौरान राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की सांसद समीना मिया ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक तत्व राजनीतिक फायदे के लिए दो ऐसे धार्मिक समुदायों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं जो लंबे समय से शांतिपूर्वक साथ रहते आए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और स्थानीय प्रशासन ने घटना के कारणों और पुलिस फायरिंग की गहन जांच शुरू कर दी है।

