
जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का वर्षों बाद भी मुआवजा नहीं दिए जाने के मामले में राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि दो सप्ताह के भीतर संतोषजनक स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो भोपाल कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है।
दरअसल, यह मामला भोपाल निवासी जाकिर अली खान और जाहिदा बी की अलग-अलग याचिकाओं से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी जमीन भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें कानून के अनुसार मुआवजा नहीं मिला। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर याचिकाकर्ताओं को मुआवजा मिला या नहीं। यदि भुगतान नहीं हुआ तो उसके पीछे क्या कारण हैं। कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के बाद समय पर मुआवजा देना शासन की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अब तक की पूरी कार्रवाई का विवरण और मुआवजा भुगतान की स्थिति दो सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत की जाए। जवाब नहीं आने की स्थिति में भोपाल कलेक्टर को स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा।
