सना, 29 जुलाई (वार्ता) सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री घेराबंदी की घोषणा करने के एक हफ्ते बाद, यमन का ईरान समर्थित हूती गुट दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है।
इस समूह ने 20 जुलाई को सऊदी अरब पर समुद्री प्रतिबंधों की घोषणा की थी। इसके साथ ही उसने अमेरिका और उसके सहयोगियों से चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष में एक नया मोर्चा खोल दिया और खाड़ी से बाहर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ले जाने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले तेज कर दिये।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हूती दक्षिणी लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अधिकतर व्यावसायिक जहाजों पर शुल्क वसूलने की योजना का आकलन कर रहे हैं। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए हालांकि किसी समय-सीमा का खुलासा नहीं हुआ है।
हूती के मीडिया कार्यालय ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, हूती अधिकारी इस महीने की शुरुआत में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने वहां गये थे। वहां ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर दबाव बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर शुल्क वसूलने की प्रक्रिया को सामान्य बनाने के मकसद से बाब-अल-मंदेब का उपयोग करने वाले जहाजों पर पारगमन शुल्क लगाने की चर्चा की थी।
सूत्रों के अनुसार, चीनी जहाजों को ऐसे किसी भी शुल्क से छूट मिलेगी। यह छूट चीन और हूतियों के बीच उस सीधे संपर्क को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य निशाना बने बिना चीनी टैंकरों को दक्षिणी लाल सागर से गुजरने की अनुमति दिलाना है। बाब-अल-मंदेब के रास्ते जहाजों की आवाजाही में किसी भी बाधा से सऊदी अरब के हाथ से होर्मुज जलडमरूमध्य का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग निकल जायेगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
लाल सागर में व्यावसायिक आवाजाही अभी तक हूती के उस अभियान के असर से पूरी तरह नहीं उबर पायी है, जो नवंबर 2023 में मर्चेंट जहाजों के खिलाफ शुरू हुआ था। तब इस समूह ने कहा था कि वह गाजा युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों के समर्थन में यह कार्रवाई कर रहा है। पिछले अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम के बाद उन हमलों में कमी आयी थी।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह यमन के पास जीजान बंदरगाह के करीब कम से कम एक सऊदी तेल टैंकर पर हमला हुआ है और हूतियों ने इसकी जिम्मेदारी ली है।संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के पैनल की 2024 की एक रिपोर्ट में यह आरोप भी लगा था कि हूतियों ने अपने समुद्री अभियान के चरम के दौरान सुरक्षित मार्ग देने के बदले लाल सागर और अदन की खाड़ी में काम करने वाली कुछ शिपिंग एजेंसियों से पैसे वसूले थे।पैनल ने कहा कि वह इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में असमर्थ रहा, जिनमें यह दावा भी शामिल था कि यह वसूली हर महीने 18 करोड़ डॉलर तक पहुंच गयी थी।
सूत्रों के अनुसार, बाब-अल-मंदेब के रास्ते एशिया की यात्रा में औसतन 16 दिन लगते हैं, जबकि उत्तरी लाल सागर, स्वेज नहर और दक्षिणी अफ्रीका के चक्कर लगाकर जाने वाले जहाजों को लगभग 50 दिन लग जाते हैं।
