
छतरपुर/गौरिहार। मध्यप्रदेश सरकार भले ही अस्पतालों में स्वच्छता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन छतरपुर जिले के समुदाय स्वास्थ्य केंद्र गौरिहार की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां मरीजों, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जिंदगी मानो भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।
अस्पताल परिसर में जिस बोरवेल से पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है, वह तालाब के बीचों-बीच दूषित वातावरण में स्थित है। बोर के चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। आरोप है कि तालाब का दूषित पानी बोर में रिस रहा है और वही पानी सीधे अस्पताल की पानी की टंकी तक पहुंच रहा है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल का आरओ सिस्टम बंद पड़ा है, जबकि वाटर कूलर में सीधे इसी पानी की सप्लाई की जा रही है। ऐसे में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को शुद्ध पेयजल मिलना तो दूर, दूषित पानी पीने की मजबूरी बनी हुई है।
यही नहीं, अस्पताल में व्यवस्थाओं का हाल इतना बदतर है कि समय पर नवजात शिशुओं के लिए दूध उपलब्ध नहीं हो पाता और गर्भवती महिलाओं को समय पर नाश्ता तक नहीं दिया जाता। अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। जगह-जगह गंदगी पसरी है, जिससे संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल का निरीक्षण स्वयं एसडीएम द्वारा किया जा चुका है, तब भी व्यवस्थाओं में कोई सुधार क्यों नहीं हुआ? यदि निरीक्षण के बाद भी हालात जस के तस हैं तो निरीक्षण की कार्रवाई केवल औपचारिकता थी या फिर जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का माध्यम?
अनियमितताओं की जानकारी विभाग को क्यों नहीं ?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) आर.पी. गुप्ता ने मामले में कहा कि, “मैं अभी देखता हूं और बात करता हूं।” लेकिन सवाल यह है कि इतनी गंभीर अनियमितताओं की जानकारी अब तक विभाग को क्यों नहीं थी? क्या जिला स्वास्थ्य विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा है? आखिर मरीजों की जान से जुड़े मामलों में जवाबदेही कौन तय करेगा?
अस्पताल में फैली अव्यवस्था, दूषित पेयजल, बंद आरओ, साफ-सफाई की कमी और मरीजों को मूलभूत सुविधाएं न मिलना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़ी जनस्वास्थ्य समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
