ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने तीन तेल टैंकरों को होर्मुज निशाना बनाकर रोक दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
तेहरान, पश्चिम एशिया में युद्ध और शांति के बीच जारी खींचतान अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार सुबह ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई से वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप मच गया है।
चेतावनी की अनदेखी का दावा
ईरान की सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के बयानों के अनुसार, यह कार्रवाई बुधवार सुबह, 29 जुलाई 2026 को की गई। ईरानी सेना का दावा है कि इन तीन तेल टैंकरों को बार-बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने समुद्री प्रोटोकॉल और ईरानी चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
इसके बाद ईरानी सशस्त्र बलों ने उन्हें निशाना बनाकर बीच समुद्र में ही रोक दिया। हालांकि, अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि ये टैंकर किन देशों के थे, लेकिन इस घटना ने लाल सागर और होर्मुज में पहले से मौजूद तनाव को कई गुना बढ़ा दिया है।
ट्रंप के मुआवजा प्लान पर भड़का ईरान
ईरान की यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। दरअसल, यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया फैसले का प्रतिशोध माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान द्वारा जंग के दौरान क्षतिग्रस्त किए गए जहाजों को ‘ईरान की जब्त संपत्तियों’ से मुआवजा दिया जाएगा। ट्रंप के इस ऐलान को तेहरान ने अपनी संप्रभुता पर हमला बताया था।
ईरान के शीर्ष सैन्य कमान मुख्यालय ‘खातम अल-अंबिया’ के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने ट्रंप के प्रस्ताव को ‘अवैध’ करार देते हुए कड़ी चेतावनी दी थी। जुल्फिकारी ने कहा था कि यदि किसी भी देश या कंपनी ने ईरान की जब्त संपत्ति को छुआ, तो उसके जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बुधवार का हमला इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
वैश्विक शिपिंग के लिए बढ़ता खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल की सप्लाई करता है। ईरान ने अब खुलेआम चेतावनी दी है कि वह ट्रंप के कड़े रुख का जवाब सैन्य ताकत से देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इसी तरह टैंकरों को निशाना बनाता रहा, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और अमेरिका-ईरान के बीच सीधी जंग छिड़ सकती है। फिलहाल, अमेरिकी सेंट्रल कमांड इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
