जेनेवा, 27 जुलाई (स्पुतनिक/वार्ता) जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि गेनाडी गैतिलोव ने आरआईए नोवोस्ती को बताया कि अमेरिकी परमाणु “सुरक्षा कवच” की विश्वसनीयता पर संदेह होने के कारण यूरोपीय देश अपनी खुद की प्रतिरोधक क्षमताएं विकसित कर रहे हैं।
राजनयिक ने कहा, “अमेरिकी परमाणु ‘सुरक्षा कवच’ की विश्वसनीयता पर शक होने के कारण, यूरोपीय देश अब अपनी खुद की सुरक्षा प्रणालियाँ विकसित करने पर काम कर रहे हैं।” श्री गैटिलोव के अनुसार, “यह सब सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित नहीं है।”
श्री गैटिलोव का मानना है, “फ्रांस पहले से ही जर्मनी और पोलैंड के साथ व्यावहारिक परमाणु सहयोग की शुरुआत कर चुका है। अभी पिछले हफ़्ते ही, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लड़ाकू विमानों में हवा में ही ईंधन भरने का संयुक्त फ़्रांसीसी-जर्मन अभ्यास हुआ। स्पष्ट है कि यह तो बस शुरुआत है।”
उन्होंने कहा कि यह बात अहम है कि बर्लिन में अपने परमाणु हथियार रखने की समझदारी पर पहले से ही सार्वजनिक बहस चल रही है और वारसॉ में भी ऐसे लोग हैं जो इस संभावना को खारिज नहीं करते हैं।
स्थायी प्रतिनिधि ने कहा, “फिनलैंड, एस्टोनिया और लिथुआनिया जैसे देश अपने वरिष्ठ सहयोगी के प्रति वफादारी दिखाने की होड़ में हैं और नाटो सहयोगियों के परमाणु हथियारों को अपने यहां तैनात करने की संभावना तलाश रहे हैं।”
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मार्च में घोषणा की कि देश उन्नत परमाणु प्रतिरोध के दौर में प्रवेश कर रहा है। इस नई रणनीति के तहत, पेरिस परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाएगा और यूरोपीय देश संयुक्त प्रतिरोध अभ्यासों में भाग ले सकेंगे।
श्री मैक्रों के अनुसार, आठ यूरोपीय देश फ़्रांस की नीति में शामिल होंगे: यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, पोलैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम, ग्रीस, स्वीडन और डेनमार्क।
हाल के वर्षों में, रूस ने अपनी पश्चिमी सीमाओं के पास नाटो की अभूतपूर्व गतिविधियों की बात कही है। नाटो अपनी पहल का विस्तार कर रहा है और इसे “रूसी आक्रामकता को रोकने” का कदम बता रहा है। मास्को ने यूरोप में गठबंधन की सेनाओं की तैनाती को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त की है। क्रेमलिन ने ज़ोर देकर कहा कि रूस से किसी को कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन वह अपने हितों के लिए संभावित रूप से ख़तरनाक गतिविधियों को नज़रअंदाज़ नहीं करेगा।
