2 किमी सड़क के इंतजार में बीतीं चार पीढ़ियां: कीचड़ बना रोड़ा, सीहोर के नयापुरा में 40 से अधिक युवकों की नहीं हो रही शादी

सीहोर। आजादी के दशकों बाद भी जिले की ग्राम पंचायत कराडिय़ा भील के नयापुरा गांव के लोग महज 2 किलोमीटर पक्की सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं. हालात इतने खराब हैं कि बरसात में गांव का संपर्क टूट जाता है और अब इसका असर सामाजिक जीवन पर भी पडऩे लगा है. ग्रामीणों का दावा है कि बदहाल सड़क और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण गांव के 40 से अधिक युवकों के विवाह तक नहीं हो पा रहे हैं. 2 किलोमीटर सड़क के इंतजार में बीत गईं चार पीढिय़ां, बदहाली ऐसी कि 40 से ज्यादा युवकों के विवाह नहीं हो रहे .

विकास के दावों के बीच जिले की ग्राम पंचायत कराडिय़ा भील के नयापुरा गांव की तस्वीर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है. आजादी के करीब आठ दशक बाद भी गांव के लगभग 450 ग्रामीण महज 2 किलोमीटर पक्की सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बरसात शुरू होते ही गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से लगभग कट जाता है. कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को राशन लेने तक के लिए 8 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण, बिजली लाइन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो वे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

सड़क बनी सामाजिक संकट, कई युवा अविवाहित

ग्राम नयापुरा की बदहाल सड़क अब केवल आवागमन की समस्या नहीं रही, बल्कि सामाजिक संकट का कारण भी बन गई है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव के 40 से अधिक युवक आज भी अविवाहित हैं. जब रिश्ते लेकर लोग गांव पहुंचते हैं और सड़क, कीचड़ तथा मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखते हैं तो बिना रिश्ता तय किए लौट जाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि एक छोटी-सी सड़क की कमी ने गांव के युवाओं के भविष्य और परिवारों की खुशियों पर भी असर डाल दिया है.

व्यथा! दादा, पिता और नई पीढ़ी भी सड़क के इंतजार में

करीब 102 परिवारों वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि उनके दादा, पिता और अब उनकी पीढ़ी भी सड़क बनने का इंतजार करते-करते थक चुकी है. हर चुनाव में सड़क का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद आश्वासन भी खत्म हो जाते हैं. बरसात में स्कूली बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जबकि एंबुलेंस, जननी एक्सप्रेस और अन्य सरकारी वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते. गंभीर मरीजों को चारपाई या निजी वाहन से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है.

खंबे लगे लेकिन चार माह से केबल नहीं चढ़ी

गांव में बिजली व्यवस्था भी बदहाल है. बिजली के खंभे तो खड़े कर दिए गए, लेकिन उन पर अब तक लाइन नहीं डाली गई. पिछले चार महीने से बिजली की केबल जमीन पर पड़ी हुई है. मजबूरी में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर अस्थायी तार डालकर घरों तक बिजली पहुंचाई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. कई बिजली के खंभे भी टेढ़े हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की.

दूसरे चरण में हो सकता है निर्माण

पूर्व में स्वीकृत सड़क का निर्माण ग्राम में क्यों नहीं हो सका, इसकी जानकारी मुझे नहीं है. हालांकि मजरा-टोला योजना के तहत सड़क का सर्वे किया जा चुका है और दूसरे चरण में इस मार्ग का निर्माण शुरू होने की संभावना है.

यशवंत सक्सेना,
प्रबंधक, पीएम ग्राम सड़क

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