
भोपाल। श्री विद्योदय तीर्थ, एमपी नगर में चल रहे वर्षायोग के दौरान आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण, स्वाध्याय और पुरुषार्थ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म का उपदेश उसी व्यक्ति को दिया जा सकता है, जिसके भीतर जिज्ञासा और श्रद्धा हो। प्रवचन सुनने में रुचि न रखने वाले पर धर्म थोपा नहीं जा सकता।
आचार्य श्री ने कहा कि मन चंचल होता है, इसलिए उसे स्थिर रखने के लिए शास्त्रों का निरंतर अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने अपनी शक्ति के अनुरूप कार्य करने की सीख देते हुए कहा कि न सामर्थ्य छिपानी चाहिए और न ही क्षमता से अधिक भार उठाना चाहिए। उन्होंने आगम पर अटूट विश्वास रखते हुए पुरुषार्थ को जीवन का आधार बताया तथा कहा कि मांगने के बजाय आत्मनिर्भरता अपनाना ही साधना का सही मार्ग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आपसी विवाद से दूर रहकर गुरु के प्रकल्पों को पूर्ण समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
