
प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली। सड़क से शुरू हुआ छात्र आंदोलन कराहते घायलों के साथ अस्पताल की दीवारों से उपजी आक्रोश की चिंगारी के साथ देखते ही देखते नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ देश के सबसे सुरक्षित और रसूखदार राजनीतिक गलियारे तक फैल गया है. इतना ही नहीं इस घमासान का सीधा असर संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी दिखाई दिया जहां विपक्षी हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्रवाई बाधित हुई.
पिछले दिनों पुलिसिया कार्रवाई में घायल लगभग 60 छात्रों में से अभी भी अस्पताल में भर्ती कुछ छात्रों को देखने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल का दौरा कर घायल छात्रों और एक छात्रा जो वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही है उनके व्यथित परिजनों से मुलाकात की. कांग्रेस ने इसे एक सामान्य प्रशासनिक विफलता मानने से साफ इनकार करते हुए इसे देश की युवा शक्ति के सुनहरे भविष्य पर एक सोची-समझी चोट करार दिया है. हालांकि सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना.
अस्पताल से निकलते ही आंदोलन की आंच सड़कों से होते हुए देश के सबसे सुरक्षित राजनीतिक गलियारे तक पहुंच गई. राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास की तरफ मार्च किया और वहां धरने पर बैठ गए. हाथों को नायलॉन की रस्सियों से बांधकर किया गया .यह अनूठा प्रदर्शन प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दे रहा था कि सरकार युवाओं की आवाज को बांधने का प्रयास कर रही है. विपक्ष की मांग अब सिर्फ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नहीं है बल्कि वे सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से इस पुलिसिया कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए उनके इस्तीफे और राष्ट्र से माफी की मांग पर अड़ गए हैं. हालांकि इस अभूतपूर्व गतिरोध के बीच, केंद्र सरकार की ओर से केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह खुद प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे. उन्होंने धरना दे रहे राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से बातचीत की और स्थिति को संभालने का प्रयास किया.
कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार के सामने 5 प्रमुख मांगें रखी है. जिनमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पेपर लीक मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, घायल छात्रों को मुआवजा और पुलिस कार्रवाई पर तत्काल रोक शामिल है.
इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले राहुल गांधी ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मुलाकात कर छात्रों पर हुई बर्बरता पर सदन में विशेष चर्चा कराने की लिखित मांग सौंपी थी. उसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने परीक्षा संकट और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग को लेकर भारी हंगामा किया. नारेबाज़ी और पोस्टरों के बीच सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा. विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों से जुड़े इस गंभीर विषय पर संसद में बहस से भाग रही है, जबकि सरकार का तर्क है कि वह नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष कार्यवाही को बाधित कर रहा है.
