वाशिंगटन, 20 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि 2020 के अमेरिकी चुनावों में चीन के दखल के आरोपों को लेकर बढ़े तनाव के बावजूद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर में प्रस्तावित अमेरिका यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी।
श्री रुबियो ने कहा कि वह आसियान बैठकों के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मिलने के लिए तैयार हैं क्योंकि वह दुनिया की बड़ी ताकतों के साथ बातचीत निरंतर रखना चाहते हैं।
श्री रूबियो ने रविवार को पत्रकारों से कहा, “हमें उम्मीद है कि यह यात्रा सितंबर में होगी।” उन्होंने आगे कहा कि चीनी अधिकारी इसकी तैयारी के लिए अपनी टीमें भेजते रहे हैं और मुझे इसके विपरित कोई जानकारी नहीं मिली है।”
श्री रुबियो ने कहा कि लगातार मतभेदों के बावजूद वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बातचीत जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “जब अमेरिका और चीन जैसे दो बड़े एवं ताकतवर देश हों तो उनके बीच मतभेद या तनाव की स्थिति तो बनी ही रहती है। लेकिन मुझे लगता है कि हमारे जैसे ताकतवर और अहम देशों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे बातचीत जारी रखें और आपसी संबंध बनाये रखें। यह एक-दूसरे के प्रति, अपने लोगों के प्रति और दुनिया के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी है।”
ये टिप्पणियां तब आयी जब श्री ट्रंप ने हाल ही में 2020 के अमेरिकी चुनावों में चीन के दखल का आरोप लगाया जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या शी की प्रस्तावित यात्रा पर इसका असर पड़ सकता है।
श्री ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट कर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में बड़े पैमाने पर वोटर धोखाधड़ी और चीन के दखल के अपने आरोपों को फिर से दोहराया।
श्री ट्रंप ने गुरुवार को देश के नाम एक बहुप्रतीक्षित भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अपने प्रशासन द्वारा जुटाये गये नये सबूत पेश किये। इन सबूतों के माध्यम से उन्होंने दावा किया कि 2020 का चुनाव जिसमें वह पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन से हार गए थे “चुराया” गया था।
कई स्वतंत्र विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाइट हाउस ने 20 मिनट के भाषण के साथ जो फ़ाइलें जारी कीं उनसे अमेरिकी चुनाव प्रणाली में कोई बड़ी या चौंकाने वाली कमियां सामने नहीं आयी।
श्री ट्रंप ने शुक्रवार देर रात बिना सबूत वाले उन दावों को फिर से उठाया। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि उनमें इस बात का सबूत है कि चीन ने “इतिहास में चुनावी डेटा की सबसे बड़ी सेंधमारी” की। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने गैर-कानूनी तरीके से 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें प्राप्त कीं।
जानकारों का कहना है कि अमेरिक डेटा इकट्ठा करने की चीन की कोशिशों के बारे में कई सालों से पता है और वोटर डेटा ऑनलाइन आसानी से मिल सकता है। इसके अलावा, व्हाइट हाउस के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि चीन ने इस डेटा का इस्तेमाल मुख्य रूप से चुनावी नतीजों का अनुमान लगाने के लिए किया था न कि वोटों में हेरफेर करने के लिए। साथ ही, श्री रुबियो ने कहा कि जारी विवादों के बावजूद वॉशिंगटन बड़ी ताकतों के साथ बातचीत बनाए रखना चाहता है।
श्री रुबियो ने कहा कि आसियान बैठक से अमेरिका को क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ द्विपक्षीय बैठकों और बहुपक्षीय मंचों, जिनमें भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘क्वाड’ भी शामिल है, के ज़रिए जुड़ाव और गहरा करने का मौका मिलेगा।
श्री रुबियो ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या वह चुनाव में चीन के दखल के बारे में श्री ट्रंप के आरोपों को उठायेंगे; उन्होंने कहा कि चीन के साथ बातचीत नाजुक मामले हैं।
