बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर के पुराने शहर की तंग गलियों में एक कमरे के छोटे से घर में रहने वाले भाई-बहन नूरुल हसन और समिया खातून ने विपरीत परिस्थितियों को मात देते हुए पहली ही कोशिश में NEET (UG) 2026 परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रेरणादायी मिसाल पेश की है। परिवार पर उस समय बड़ा संकट आ गया था, जब उनके पिता की दोनों किडनियां खराब हो गईं और मां ने अपना एक गुर्दा दान कर उनकी जान बचाई। ऐसे कठिन दौर में दोनों भाई-बहन ने माता-पिता की देखभाल के साथ पढ़ाई भी जारी रखी।
घर में पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल नहीं था। पुराने शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित एक कमरे के मकान के बाहर लगातार शोर-शराबे के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया।
नूरुल हसन ने 720 में से 609 अंक हासिल कर 99.6196300 पर्सेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 7596 प्राप्त की। वहीं, समिया खातून ने 568 अंक के साथ 98.76 पर्सेंटाइल और AIR 24790 हासिल की।
दोनों का कहना है कि उनकी मेहनत और धैर्य का फल मिला है तथा उन्हें उम्मीद है कि राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलेगा। उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि मजबूत संकल्प, कठिन परिश्रम और सकारात्मक सोच के बल पर बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी सफलता की सीढ़ी बनाया जा सकता है।
