महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
बीते दिवस मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा फैसला लेते हुए मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस ले लिया। अब लखन पटेल केवल आनंद विभाग के मंत्री ही रहेंगे। पशुपालन विभाग वापस लिए जाने के बाद प्रतिक्रिया स्वरूप लखन पटेल इसे मुख्यमंत्री का विशेष अधिकार बता रहे हैं, मगर उनके विधानसभा क्षेत्र पथरिया में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सतही तौर पर कुछ लोग स्वावलंबी गौ शालाओं के लिए चुनी गई संस्थाओं से प्रदेश सरकार की असंतुष्टि से जोड़ रहे हैं। राजनीतिक गालियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले को लेकर विगत तीन – चार माह से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हें समझाइश दे रहे थे। इस बीच स्वावलंबी गौ शालाओं के लिए संस्थाओं को जमीन आंवटन की शिकायत संघ और भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय तक पहुंची थी , लिहाजा प्रदेश सरकार के मुखिया को उपरोक्त फैसला लेना पड़ा। इससे इतर एक चर्चा यह भी है कि दमोह जिले के जरारुधाम गौ अभ्यारण्य से कुछ किलोमीटर दूर एक अन्य गौशाला की शुरुआत होने जा रही है , जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाने की तैयारी की जा रही थी। कहासुनी पर विश्वास करें तो कार्यक्रम का न्यौता प्रधानमंत्री को लखन पटेल स्वयं ही दे आए थे, वह भी मुख्यमंत्री की जानकारी में लाये बिना। सूबे की राजधानी तक जब इसकी जानकारी पहुंची तो लखन पटेल के कामकाज के तौर – तरीकों पर सवाल उठे। मुख्यमंत्री की खामोश नाराज़गी के बीच भगवादल के केंद्रीय कार्यालय से भी कुछ ऐसे ही संदेश भोपाल पहुँचने की चर्चाएं सरगर्म हैं। हकीकत क्या है , यह तो मुख्यमंत्री और पार्टी के
कर्णधार जानते हैं, परन्तु दमोह में लखन समर्थकों के चेहरों पर मायूसी के भाव स्पष्ट देखे जा रहे हैं, जबकि विरोधियों की आँखों में चमक दिखने लगी है।
ननि में दलाल फिर हुए सक्रिय
मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी नगर निगम की कार्यप्रणाली की चर्चाएं फिर सरगर्म हो रहीं हैं जो इस मर्तबा काफी समय से खामोश दलालों की पुनः सक्रियता से जुड़ी है । दरअसल नगर निगम की पूर्व आयुक्त प्रीति यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और दलाली की शिकायतों के मद्देनजर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम मुख्यालय में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि नगर निगम के कामकाज में बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके सख्त रुख के चलते तथाकथित कमीशनबाजों ने नगर निगम मुख्यालय से दूरी बना ली थी , किंतु कुछ महीनों पूर्व उनके स्थानांतरण पश्चात कथित दलालों की अधिकारियों के साथ गलबहियां फिर प्रारंभ हो गई हैं। नगर निगम गलियारों में चर्चा है कि एक व्यक्ति नियमित अंतराल पर नगर निगम मुख्यालय पहुँच रहा है और मकान निर्माण, नक्शा तथा भवन शाखा से संबंधित कार्यों में न केवल दखल दे रहा है, बल्कि इन विभागों के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर फाइलों का लेन देन भी कर रहा है। इसके अलावा एक अन्य अतिक्रमण विभाग के गोरखधंधे में मलाई काट रहा है। अवैध निर्माण से लेकर रेहड़ी – पटरी वालों से सेटिंग कर जमकर उगाही की जा रही है। दलालों – अधिकारियों की संगामित्ती का असर यह है कि जायज काम अटक रहे हैं और नाजायज कामों की फाइलें सरपट दौड़ रहीं हैं और मुख्यालय के मुखिया तथा जबलपुर के प्रथम नागरिक लगातार सुबह से शाम तक शहर विकास के तानेबाने बुन रहे हैं। इन हालातों के बीच नागरिक सवाल दाग़ रहे हैं कि नगर निगम के दो मुखियाओं की कसरत आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम, धराशायी होती जर्जर इमारतें , जलभराव, जर्जर सड़कों से राहत दिलाएगी या फिर कमीशनबाजों की कारस्तानी हमेशा की तरह कोई ना कोई गुल खिलाती रहेगी ।
